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हैलट आने वाले 70 फीसदी रोगियों को होती डायबिटीज, कोरोना के 40 फीसदी गंभीर रोगी होते हैं इसके शिकार

Tue, 08 Sep 2020 04:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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हैलट में संक्रमण विभाग - फोटो : amar ujala
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कानपुर हैलट इमरजेंसी में आने वाले 70 फीसदी रोगियों को डायबिटीज होती है। आम दिनों की ओपीडी में 40 फीसदी रोगी डायबिटीज की गिरफ्त में होते हैं। इसके अलावा कोरोना काल में जो गंभीर रोगी आ रहे हैं उनमें 60 फीसदी को डायबिटीज होती है।
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इसलिए हैलट में डायबिटीज के विशेषज्ञ इंडोक्रोनोलॉजिस्ट की सख्त जरूरत है। कोरोना संक्रमित रोगियों को खासतौर पर इस विशेषज्ञता के डाक्टरों की जरूरत है। विशेषज्ञ न होने से रोगियों को उच्च गुणवत्ता का इलाज नहीं मिल पाएगा।

जिला अस्पताल उर्सला, केपीए, कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में इस वक्त कोई मधुमेह रोग विशेषज्ञ नहीं है। अब मेडिकल कालेज में भी सन्नाटा हो गया है। इंडोक्रोनोलॉजिस्ट होने की वजह से अभी आसपास के जिलों के लोग यहां इलाज के लिए आते रहे हैं।
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विभिन्न संगठनों के सर्वेक्षणों के अनुसार शहर में 14 फीसदी आबादी हाई ब्लड शुगर की गिरफ्त में है। इसके अलावा बहुत से लोग प्रि डायबिटिक की स्टेज में रहते हैं। हैलट में विशेषज्ञ होने की वजह से एक रुपये के परचे पर इलाज मिल जाता है। मेडिकल कालेज की उप प्राचार्य और हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि डायबिटीज के रोगियों की संख्या अधिक रहती है। 
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