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यमुना नदी में जाता है शहर का गंदा पानी

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। नगर पालिका परिषद क्षेत्र के गंदे पानी का बहाव गंगा नदी में नहीं है। पूरे शहर का पानी चार प्रमुख नालों से होकर यमुना की सहायक ससुर खदेरी नदी में पहुंचता है। गंदे नालों के पानी से शहर के आसपास की जमीन की सिंचाई होती है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नगर पालिका क्षेत्र का गंदा पानी शोधित किए बगैर गंगा में बहाने को लेकर नोटिस जारी किया है। नगर पालिका का कहना है कि शहर में प्रमुख चार गंदे नाले हैं। इनसे शहर का गंदा पानी मदारियापुर से बड़े पुल के आसपास निकलता है। एक नाला राधानगर में झाऊपुर होकर गुजरता है। दूसरा नाला शहर के गढ़ीवा मोहल्ले से निकलता है। तीसरा नाला नागा निरंकारी बालिका इंटर कालेज होकर तथा चौथा नाला रामगंज पक्का तालाब एफसीआई गोदाम होकर जाता है। ये सभी नाले ससुर खदेरी नदी मेें गिरते हैं। ससुर खदेरी नदी यमुना नदी की सहायक है।
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शहर से ससुर खदेरी नदी गुजरने के रास्ते की दूरी 60 से 65 किमी के आसपास है। ऐसे में शहर का गंदा पानी आधे रास्ते में ही सूख जाता है। जहां तक पानी पहुंचता है वहां किसान पंपिंग सेट लगाकर अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। कार्यवाहक ईओ राजेंद्र वर्मा का कहना है कि निकाय को नोटिस जारी होना गलत है। ईओ के आते ही जवाब भेज दिया जाएगा।
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औद्योगिक इकाइयों का पानी मिलता गंगा में
फतेहपुर। गंगा में पांडु नदी के रास्ते औद्योगिक क्षेत्र चौडगरा की कई फैक्ट्रियों का गंदा पानी मिलता है। फैक्ट्रियों में लगे सीवरेज शोधक प्लांटों का उपयोग नहीं किया जाता है। कई फैक्ट्रियों ने जमीन के अंदर ही अंदर पाइप लाइन बिछाकर पांडु नदी में पानी निकाला है, जिससे लोगों को जानकारी भी नहीं हो पाती है। गंगा के प्रदूषण को पांडु नदी जरूर प्रभावित करती है, लेकिन यह क्षेत्र नगर पालिका दायरे से दूर है।
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