अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। मौलाना मुहम्मद अली जौहर जंग-ए-आजादी के ऐसे महान सपूत थे । जिन्होंने अंग्रेज शासकों के हिंदू-मुस्लिम में फूट डालो और राज करो के षड्यंत्र को विफल करके भारत को गुलामी से आजाद कराने की नींव रखी। ये बातें कौमी तहफ्फुज कमेटी के संयोजक खादिम अब्बास ने स्थानीय पक्का तालाब पर स्थित मदरसा दारुल उलूम चिश्तिया पर मौलाना मुहम्मद अली जौहर की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में व्यक्त किए ।
मदरसा दारुल उलूम चिश्तिया के प्रधानाचार्य इमरान अहमद ने कहा कि मौलाना मुहम्मद अली जौहर उच्च कोटि के साहित्यकार और पत्रकार थे। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनकी लेखनी ने तहलका मचा दिया था। मौलाना जौहर ने अंग्रेजी में कामरेड अखबार का प्रकाशन किया। उर्दू भाषा में ‘हमदर्द’ अखबार निकाल कर अंग्रेजों के खिलाफ आग उगलना शुरू कर दिया।
पूर्व जिला अध्यक्ष बीएसपी लाखन सिंह जाटव ने कहा कि मौलाना मुहम्मद अली जौहर का जन्म 10 दिसम्बर 1878 में जिला रामपुर में हुआ था। 1930 में मौलाना जौहर ने लंदन के गोल मेज सम्मेलन में भाग लिया। सम्मेलन में उन्होंने अंग्रेजी शासकों पर सीधा हमला बोलते हुये कहा कि मुहम्मद अली लंदन में आजादी का परवाना लेने आया है।
संयोग देखिये कि आजादी के मतवाले मौलाना मुहम्मद अली जौहर में डेढ़ महीने पश्चात् उनका लंदन में इंतकाल हो गया और उन्हें फिलिस्तीन में दफनाया गया। समारोह में हाफिज अदनान, हाफिज मुनाजिर देहलवी, अबरार हुसैन देहलवी, जीशान, अरशद वारसी, सरफराज, इरशाद, शोएब सिद्दीकी, हाफिज फैजान अहमद, अनवार, कासिम अली, यूसुफ अली, फरहान शान, शहबाज, अल्ताफ अहमद आदि मौजूद रहे।