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गैटमेन की फुर्ती से बचा हादसा

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अमर उजाला ब्यूरो
मिरगांवा।
कानपुर-फर्रुखाबाद पैसेंजर ट्रेन शुक्रवार को हादसे का शिकार होने से बच गई। गेटमैन की फुर्ती से सभी यात्री बाल-बाल बच गए। हुआ यूं कि मिरगांवा क्रासिंग खुली थी और तेजी से ट्रेन आ गई। तमाम लोग क्रासिंग पार करने में जुटे थे। लोगों ने सामने ट्रेन देखी तो हड़कंप मच गया। एक ट्रैक्टर और अध्यापिका के तो बहुत करीब से ट्रेन गुजर गई।

शुक्रवार सुबह करीब 7:55 पर जलालाबाद से होकर मिरगांवा क्रासिंग होते हुए फर्रुखाबाद जाने वाली पैसेंजर ट्रेन 54157 से बड़ा हादसा होते बचा। क्रासिंग पर पहुंचने से कुछ सेकेंड पहले ही गेटमैन अनिल कुमार ने क्रासिंग को बंद किया। उसने बताया कि वह केबिन के बाहर बैठा हुआ था। तभी उसने करीब 200 मीटर की दूरी पर जलालाबाद की ओर से गाड़ी को तेज रफ्तार में आते देखा, उसे कुछ समझ नहीं आया उसने दौड़कर क्रासिंग को बंद किया। बताया कि क्रासिंग पूरी तरह से बंद भी नहीं हो पाई, तब तक गाड़ी ट्रैक पर लगी लाल झंडियों को रौंदती हुई गुजर गई। क्रासिंग कर गार्ड ने ट्रेन रुकवाई और उतरकर क्रासिंग बंद न होने का कारण गेटमैन से पूछा। गेटमैन ने गार्ड को अपना रजिस्टर दिखाते हुए बताया कि गाड़ी क्रास होने की जानकारी उसे गुुरसहायगंज से दी जाती है, उसके बाद वह क्रासिंग को बंद करता है। आज उसे गुरसहायगंज कंट्रोल रूम से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उसने गाड़ी को दूर से आता देख दौड़कर क्रासिंग को बंद कर दिया। इससे करीब पांच मिनट तक गाड़ी वहीं खड़ी रही। गार्ड ने विभाग को जानकारी देकर गाड़ी को गुरसहायगंज के लिए हरी झंडी दिखाई। इसके बाद खराब हो चुकी लाल झंडियों को गुरसहायगंज स्टेशन से की-मैन ने आकर बदला।
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रेलवे सूत्रों के मुताबिक जिस समय पैसेंजर ट्रेन जलालाबाद से होकर मिरगांवा से गुजर रही थी। उस समय स्टेशन पर एएसएम परमेश्वर दयाल ड्यूटी पर थे। सूत्रों के अनुसार उन्होंने गेट मैन को गाड़ी आने की सूचना नहीं दी। इस संबंध में देर शाम तक इज्जतनगर मंडल से अधिकारियाें का एक पैनल भी पहुंच गया है। जो पूरे घटनाक्रम की बिंदुवार जांच में जुट गया है। वहीं रेलवे को कोई अधिकारी इस पर बोलने को तैयार नहीं है।


ग्रामीण ने बचाई शिक्षिका की जान
मिरगांवा। गेटमैन ने दौड़कर जब क्रासिंग को बंद करना शुरू किया तब तक गुगरापुर ब्लाक के गांव मुर्रा के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षामित्र नीलम कठेरिया ट्रैक के समीप पहुंच गई थी। उनके मुताबिक, वह ट्रेन के आने से अनजान थीं। उनकी गोद में एक वर्षीय पुत्री नव्या भी थी। ट्रैक पर शिक्षिका को देख वहां मौजूद सुरेंद्र जोशी ने दौड़क र उन्हें ट्रैक से बाहर खींचा। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो इसमें यदि एक पल भी देर हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
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क्रासिंग में फंस सकता था, ट्रैक्टर
मिरगांवा। क्रासिंग खुली होने से राहगीरों को ट्रेन के आने का बिल्कुल अंदेशा नहीं था। मिरगांवा गांव की ओर से आ रहा एक ट्रैक्टर क्रासिंग के एक बैरियर को आधा पार कर चुका था। उसने जब गेटमैन को आनन-फानन में गेट बंद करते देखा। तो तत्काल ट्रैक्टर को वापस किया। ट्रैक्टर चालक व गेटमैन के मुताबिक यदि इसमें 10 सेकेंड की भी देरी होती तो ट्रैक्टर ट्रैक पर पूरा पहुंच जाता और हादसा हो जाता।



हादसे का शिकार होने से बची कानपुर-फर्रुखाबाद एक्सप्रेस
-गेटमैन की फुर्ती से बचा हादसा
- गेटमैन को नहीं मिली गाड़ी आने की सूचना
- बैरियर से 200 मीटर दूर रह गई थी गाड़ी, तब दिखी
- एक ट्रैक्टर और अध्यापिका ट्रेन की चपेट में आने से बाल-बाल बचे
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