केस-3
घाटमपुर निवासी अनूप शुक्ला को उनका बेटा शुक्रवार करीब सवा तीन बजे हैलट इमरजेंसी ले गया। वहां परिजन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से हालत बिगड़ने का हवाला देकर तुरंत इलाज करने के लिए गुहार लगाते रहे। एक जूनियर डॉक्टर के पैर पकड़े तो उसने नंबर आने पर उनका इलाज करने की बात कही। आधे घंटे बाद स्ट्रेचर में उनका इलाज शुरू हो पाया। उनसे ऑक्सीजन की कमी बताकर बाहर से सिलिंडर लाने के लिए गया गया।
कोरोना काल में हैलट इमरजेंसी में क्षमता से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। शुक्रवार सुबह 17 बेड वाले इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में 40 मरीजों का इलाज चल रहा था। बेड कम पड़ने से स्ट्रेचर पर भी इलाज शुरू करना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती करीब 80 प्रतिशत मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। - डॉ. रीता गुप्ता, कार्यवाहक प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, हैलट
बंद हैं अन्य विभाग, इस्तेमाल क्यों नहीं
हैलट में वैसे तो 1055 बेड हैं, लेकिन विभागों के बंटवारों के कारण इनका इस्तेमाल कोरोना संक्रमित या लक्षण वाले मरीजों के लिए नहीं किया जा रहा है। कोरोना के लक्षण वाले सभी केस मेडिसिन विभाग में आते हैं। इसलिए इसकी इमरजेंसी और वार्ड फुल हैं। कोरोना संक्रमण के कारण कुछ विभाग बंद हैं, यदि इन्हें खोल दिया जाए तो मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा।
हैलट में बेड - 1055
कोरोना संक्रमित भर्ती मरीज - 247
नॉन कोविड भर्ती मरीजों की संख्या - 174