कार्यक्रमों में गंगा को भले ही साफ रखने का संकल्प दिलाया जा रहा हो, तमाम सरकारी कवायद की जा रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि रोज चार करोड़ लीटर प्रदूषित पानी सीवर लाइनों के माध्यम से गंगा में पहुंच रहा है और दिन प्रतिदिन गंगा के पानी को प्रदूषित करता जा रहा है। किसी को भी गंगा में हो रहे प्रदूषण की कोई फिक्र नहीं है।
सरकारी अनदेखी हावी है
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कानपुर में सरकारी सिस्टम कुछ ऐसा है कि मौजूद संसाधनों का उपयोग भी ढंग से नहीं किया जा रहा है। जाजमऊ के 3.6 करोड़ लीटर के जल शोधन संयंत्र का उपयोग टेनरियों से निकले प्रदूषित पानी के शोधन के लिए हो रहा है। जबकि इसमें सीवर का पानी भी शोधित किया जा सकता है। टेनरी संचालक एसोसिएशन ने इस संबंध में कई बार जल संस्थान (गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई) को पत्र भी लिखा है, लेकिन सरकारी अनदेखी हावी है। जाजमऊ क्षेत्र में सीवर के पानी के शोधन के लिए 3.6 करोड़ लीटर का एक शोधन संयंत्र स्थापित किया गया था।
तीन शोधन संयंत्र स्थापित हैं
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शहर के सीवर और टेनरियों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के शोधन के लिए कुल 17.1 करोड़ लीटर (171 एमएलडी) की क्षमता के तीन शोधन संयंत्र स्थापित हैं। तीनों जाजमऊ क्षेत्र में हैं। इसमें से सबसे बड़े संयंत्र की क्षमता 13 करोड़ लीटर है। इसमें परमट से एक सीधी पाइप लाइन के जरिये सीवर का पानी पहुंचाया जा रहा है। इसी संयंत्र के पास में 5 करोड़ लीटर का एक संयंत्र और भी है। इसका प्रयोग भी सीवर लाइन के पानी के शोधन में लिया जा रहा है। तीसरा संयंत्र जो 3.6 करोड़ लीटर का है, उसमें टेनरियों से निकलने वाले पानी का कुछ हिस्सा भेजा जा रहा है।
नालों के जरिये गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है
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बाकी हिस्सा सबसे बड़े संयंत्र में भेजा रहा है। जाजमऊ से सीवर का जितना भी प्रदूषित पानी निकलता है, वह नालों के जरिये सीधे गंगा में जा रहा है। इसकी अनुमानित मात्रा 2 करोड़ लीटर है। टेनरी एसोसिएशन का कहना है कि जल संस्थान जानबूझकर 3.6 करोड़ लीटर वाले संयंत्र का पूरा प्रयोग नहीं कर रहा है। इसकी वजह यह है कि वह इस संयंत्र को खराब बताकर सरकार से इसके सुधार की बात कह रहा है।
छावनी क्षेत्र के सीवर का पानी भी गंगा में
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छावनी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सीवर लाइन टूट जाने से 13 करोड़ लीटर वाले संयंत्र में भी क्षेत्र का सीवर का पानी नहीं जा पा रहा है। यहां से भी सीवर का पानी नालों के जरिये गंगा में जा रहा है। इसकी वजह यह है कि यहां सीवर लाइन टूट गई थी। जिससे आवागमन बंद हो गया है। अब आवागमन शुरू करने के लिए उसमें मिट्टी डाल दी गई, जिससे सीवर लाइन का संचालन पूरी तरह नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सिर्फ सात करोड़ लीटर पानी ही संयंत्र में जा रहा है। पहले इससे नौ करोड़ लीटर पानी जाता था।
दो करोड़ लीटर पानी संयंत्र में नहीं पहुंच पा रहा है
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जाजमऊ के 3.6 करोड़ लीटर क्षमता वाले संयंत्र में टेनरियों के साथ सीवर का पानी भी डाला जा रहा है। टेनरी संचालकों का आरोप पूरी तरह सही नहीं है। इतना जरूर है कि छावनी क्षेत्र में सीवर लाइन टूट जाने की वजह से करीब दो करोड़ लीटर पानी संयंत्र में नहीं पहुंच पा रहा है।....आरके सिंह, महाप्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई