अधिवक्ताओं पर दर्ज मामलों से संबंधित सूची के सामने आने के बाद पुलिस का आचरण सवालों के घेरे में है। इस बीच आला अधिकारियों ने दागी पुलिस कर्मियों और अधिकारियों की सूची जारी कर दी है। डाटा जारी करते हुए अधिकारियों ने कहा है कि पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 से अब तक मारपीट, जालसाजी, दुष्कर्म समेत अन्य आरोपों में घिरे 21 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन मामलों की जांच चल रही है। इसमें तत्कालीन एसीपी कलक्टरगंज मोहसिन खान समेत दो एसआई, 10 हेड कांस्टेबल, आठ कांस्टेबल शामिल हैं। आरोपों में घिरे पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो चुकी है।
इधर पुलिस मुख्यालय में तैनात 160 पुलिस कर्मियों को विवेचना में लापरवाही, अनुशासनहीनता, लंबे समय से गैर हाजिर रहने के आरोप में दोषी पाए जाने पर परिनिंदा प्रविष्टि से दंडित किया है। इसमें इंस्पेक्टर, एसआई, कांस्टेबल व चुतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं। ऐसे ही पूर्वी जोन में तैनात 89, पश्मिच जोन में तैनात 41, सेंट्रल जोन में तैनात 24 व साउथ जोन में तैनात 37 व ट्रैफिक विभाग में तैनात तीन पुलिस कर्मी विभागीय जांच में दोषी पाए गए हैं। जांच अधिकारियों ने उन्हें परिनिंदा से दंडित किया है।
क्या होती है परिनिंदा?
पुलिस नियमावली के अनुसार परिनिंदा एक तरह से अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है। इसे पुलिस सर्विस बुक में दर्ज किया जाता है। परिनिंदा के अंतर्गत किसी पुलिस अधिकारी पर कदाचार और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए जाते है। पुलिस अधिकारी को उसकी गलती पर सार्वजनिक रूप से डाटना और उसे सुधार का मौका देना होता है।