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Kanpur News: 350 हेक्टेयर जमीन 49.50 करोड़ रुपये में हुई थी नीलाम

Wed, 13 May 2026 01:56 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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पुखरायां। भोगनीपुर तहसील के चपरघटा में पाॅवर प्लांट के लिए दी गई जमीन को बैंक में बंधक बनाकर करोड़ों रुपये ऋण ले लिया। ऋण जमा न कर पाने पर वर्ष 2024 में आईडीबीआई बैंक ने 350.838 हेक्टयर जमीन को 49.50 करोड़ में नीलाम किया था। इसके बाद ही सांठगांठ की पोल खुली थी।
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चपरघटा के पास अमेलिया, कछगांव, सिहारी के पास की 350.838 हेक्टयर जमीन को कानपुर नगर की आईडीबीआई शाखा में बंधक बनाया गया था। इस जमीन पर लिए गए ऋण को जमा नहीं किया गया। इसके बाद बैंक ने जनवरी 2024 में एक कंपनी को 49 करोड़ 50 लाख में नीलाम कर दिया। जानकारों की माने तो नीलाम की गई जमीन की तत्कालीन समय में करीब 200 करोड़ रुपये कीमत थी।

जमीन के नीलाम होने से लेकर पूर्व में हुई गड़बड़ी का मामला पिछले वर्ष हुई दिशा की बैठक में उठा। इसके साथ ही शासन तक शिकायत की गई। जिसके बाद ही पूरे मामले की जांच तहसील भोगनीपुर के अधिकारियों द्वारा की जा रही थी। जांच के बाद पर्त दर पर्त गड़बड़ी निकल कर सामने आ गई। इधर 18 अप्रैल 2026 को डीएम के निर्देश पर नीलामी पर रोक लगा स्थगना आदेश रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
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पावर प्लांट लगा न रोजगार मिला

nपावर प्लांट के लिए चपरघटा, कछगांव, भुंडा, भरतौली, कुंभापुर, पड़ाव, इमलिया, सरांय, सिहारी, सरौटा सहित कई गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। साथ ही कई ग्राम पंचायतों की ग्राम समाज की भूमि भी शामिल थी। कई साल बीत जाने के बाद जब पावर प्लांट नहीं लगा और किए गए वादे पूरे नहीं हुए तो किसान जमीन वापस किए जाने की मांग करने लगे थे। ग्रामीण रामसजीवन, बेचेलाल, जगतनारायण, जगदीश, कौशल ने बताया कि पावर प्लांट लगने की घोषणा के बाद किसानों से तमाम वादे कंपनी व तत्कालीन अधिकारियों ने किए थे। जिसमें परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात भी शामिल थी। एक पीढ़ी तो बीती जा रही है। न पावर प्लांट लगा और न ही युवाओं को रोजगार मिल सका।

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टेक्सटाइल मशीन पार्क पर लगता दिख रहा ग्रहण

पावर प्लांट के नाम पर ली गई जमीन पर बैंकों द्वारा की गई हेराफेरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज हो गई है। जिसके बाद अब टेक्सटाइल मशीन पार्क बनाए जाने पर भी ग्रहण लगता दिख रहा है। चपरघटा के पास ही टेक्सटाइल पार्क बनना है। कई ग्राम पंचायतों की अलग-अलग सरकारी भूमि होने के कारण पेच फंसा हुआ था। यहां पर पूर्व में कराया गया समतलीकरण का काम भी बंद है, जो अब तक शुरू नहीं हो सका है।
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