रसूलाबाद। विज्ञापन देखने और उसे डाउनलोड करने के बदले रुपये मिलने के लालच में जिले के कई लोगों ने अपने मोबाइल में एक एप डाउनलोड किया। इससे जुड़े करीब 100 लोगों के खाते से धीरे धीरे 35 लाख रुपये पार कर दिए गए। इसके बाद अचानक एप भी बंद हो गया। धोखाधड़ी की जानकारी पर दो पीड़ितों ने मामले में ऑनलाइन आईटी एक्ट में केस दर्ज कराया है।
कस्बे के केशवनगर निवासी आकाश मिश्रा व अक्षय ने साइबर सेल में दर्ज कराए केस में बताया कि उन्होंने अपने मोबाइल में एसीईबेस्ट एप डाउन लोड किया था। एप पर विज्ञापन देखने और डाउनलोड करने पर एकाउंट में रुपये जुड़ते थे।
आईडी बनाने के लिए पहली बार में 5001 दूसरी बार में 500 रुपये बतौर सिक्योरिटी मनी ऑनलाइन जमा किया था। आकाश ने बताया कि दो बार में उसके बैंक एकाउंट से 11 हजार व अक्षय ने बताया कि 22 हजार पार हो गए। इसके बाद 31 मई से एप बंद है।
वहीं कस्बे के श्याम अग्निहोत्री ने बताया कि उनके 60 हजार रुपये, वीरू सिसौदिया के 1 लाख 65 हजार रुपये, अनुराग सिंह, विकास प्रजापति, विकास यादव, संदीप दुबे आदि समेत सौ लोगों के खाते से करीब 35 लाख रुपये पार किए गए हैं।
धोखाधड़ी के शिकार लोगों ने बताया कि विकास नगर में जनसेवा केंद्र चलाने वाले ने स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप पर एप का लिंक शेयर कर कमाई का लालच दिया था। इसके बाद लोग ठगी का शिकार हो गए। थाना प्रभारी अनुज अवस्थी ने बताया कि दो लोगों ने ऑनलाइन ठगी का केस दर्ज कराया है। अन्य लोगों को भी केस दर्ज कराने को कहा गया है। लोग करीब 35 लाख रुपये की ठगी की बात कह रहे हैं।
प्रति वीडियो 18 रुपये जुड़ते थे
कमाई का दावा करने वाले एप में प्रति कामर्शियल वीडियो डाउनलोड करने पर 18 रुपये मिलते थे। ये रुपये एप पर बनी आईडी में दिखते थे। पीड़ित आकाश व अक्षय ने बताया कि 55 सौ रुपये की सिक्योरिटी आईडी से एक दिन में 21 वीडियो डाउन लोड करने का लक्ष्य मिलता था।
वीडियो बीस सेकेंड के होते थे। इस तरह से हर दिन 378 रुपये जुड़ते थे। 30 हजार की आईडी पर 133 वीडियो लक्ष्य पूरा करने पर 2394 रुपये हर दिन जुड़ते थे। रुपये निकालने का ऑप्शन था लेकिन प्रोसेसिंग 24 घंटे ही होने की वजह से रुपये एक साथ निकलाने का सोचा। करीब सात दिन बाद ही एप बंद हो गया।
लोगों को कमाई का लालच देने वाले ऑनलाइन एप से बचना चाहिए। ये एप वायरस की तरह से पर्सनल डेटा हैक कर लेते हैं और लोग ठगी का शिकार होते हैं। साइबर सेल लगातार लोगों को जागरूक करता रहता है। इस तरह की ठगी का मामला सामने आने पर जागरूकता पंफलेट बांटे जाएंगे। पीड़ित केस दर्ज करा सकते हैं। - मनोज सिंह, साइबर सेल प्रभारी