अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने पहुंची दुष्कर्म पीड़िता को स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी का शिकार होना पड़ा। शुक्रवार रात दो बजे अस्पताल पहुंची बच्ची को उसके ही हाल पर छोड़ दिया गया। ऐसे में वह पांच घंटे तक वार्ड में महिला सिपाहियों के साथ बैठने को मजबूर हुई। शनिवार सुबह सात बजे पीड़िता का मेडिकल परीक्षण किया जा सका।
सोहरामऊ थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी युवक ने सात साल की भतीजी के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। शुक्रवार रात दो बजे महिला सिपाही उसे लेकर अस्पताल पहुंची थी। जहां उन्होंने मेडिकल परीक्षण के लिए चिकित्सकों को कागज सौंप दिए थे। हालांकि चिकित्सकों ने मेडिकल परीक्षण नहीं किया। इस बीच कई बार उन्होंने गुजारिश भी की लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। शनिवार सुबह जब मामले की सूचना सीएमएस डा. अंजू दुबे को दी गई तब जाकर बच्ची का मेडिकल परीक्षण हो सका। सीएमएस डा. अंजू दुबे ने बताया कि भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए चिकित्सकों को निर्देश दिए जाएंगे।
-शुक्रवार रात मेडिकल परीक्षण कराने पहुंची थी
-शनिवार सुबह चिकित्सकों ने किया परीक्षण