कानपुर। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हैलट अस्पताल में संचालित कैंसर ओपीडी में अभी तक 300 महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के खतरे से बचाया जा चुका है। यह महिलाएं तीन साल में अस्पताल आईं 6000 महिलाओं में शामिल हैं। अगर महिलाएं जागरूकता दिखाएं तो यह संख्या बढ़ भी सकती है। दरअसल जागरूकता की कमी के चलते देश में हर आठ घंटे में एक महिला की सर्वाइकल कैंसर से मौत हो जाती है।
हैलट अस्पताल में 2022 में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए ओपीडी की शुरुआत हुई थी। अब तक 6000 महिलाओं की जांच की गई है। इसमें से 300 महिलाओं में कैंसर होने का खतरा था। इन्हें हर तीन महीने में स्क्रीनिंग के लिए बुलाया गया। अधिकतर महिलाओं ने इलाज कराया और अब वह स्वस्थ हैं। वहीं 55-60 ऐसी महिलाएं मिली जिन्हें एडवांस कैंसर था। इनकी सर्जरी कर जान बचाई गई। डॉक्टरों के अनुसार रोजाना अस्पताल आने वाली करीब 250 महिलाओं में से 20 से 25 महिलाओं की हर रोज कैंसर स्क्रीनिंग की जाती है। यह वह महिलाएं हैं जो खुजली, लाली, पानी या खून आने जैसी समस्याएं होने पर जांच कराने आती हैं।
कैंसर ओपीडी की नोडल डॉ. नीना गुप्ता ने बताया कि अगर महिलाएं जांच कराएं तो 10-15 साल पहले ही पता चल जाएगा कि इन्हें आगे कैंसर हो सकता है या नहीं। ऐसे में इन्हें खतरे से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 21 से 65 साल की हर महिला को तीन से पांच साल में कैंसर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एचपीवी वैक्सीन लगवाने के बाद कैंसर का खतरा कम होता है।