इसकी सूची सीधे परिवहन विभाग के मुख्यालय, लखनऊ भेजी जाती है, जो नंबर जिस जिले से संबंधित होता है। वहां के आरटीओ ऑफिस में सूची भेजकर चालान के नोटिस वाहन स्वामियों को भेजे जाते हैं। इसके आधार पर कार्रवाई की जाती है।
बता दें कि पहले आरटीओ ऑफिस की प्रवर्तन टीमें ओवरलोड वाहनों को चेकिंग करती थीं। तब उतनी निगरानी नहीं हो पाती थी। तब लक्ष्य का 30 से 40 प्रतिशत राजस्व ही वसूला जाता था। यही कारण है कि तब कानपुर नगर यूपी के टॉप-50 जिलों में रहता था। अब टॉप-10 में शामिल है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में महज छह महीने में करीब 300 करोड़ रुपये के चालान होना रिकॉर्ड है। हर ओवरलोड वाहन की निगरानी हो रही है और उनके चालान किए जा रहे हैं। टोल टैक्स से ऑनलाइन निगरानी बढ़ी है। -सुनील दत्त, एआरअीओ प्रवर्तन, कानपुर नगर