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यूपी: एंबुलेंस ने बीमार तीन माह के मासूम को सड़क पर उतारा, गोद में लेकर पहुंची मां तो हो चुकी थी मौत

Sun, 04 Aug 2019 06:37 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मासूम की मौत पर रोते बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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एंबुलेंस वालों की संवेदनहीनता से शनिवार को तीन महीने के मासूम की जान चली गई। सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किए गए बुखार से पीड़ित मासूम और उसकी मां को एंबुलेंस वाले ने झींझक रेलवे क्रॉसिंग के पास उतार दिया। फिर एंबुलेंस लेकर वहां से चला गया। काफी देर तक महिला बेटे की जान बचाने के लिए गिड़गिडराती रही, लेकिन किसी ने अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई।
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महिला जब तक अस्पताल लेकर पहुंचती, उसकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टर ने उसे देखते मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत से गुस्साए परिजनों ने एंबुलेंस वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अस्पताल में हंगामा किया। सीएचसी प्रभारी ने उन लोगों को समझा कर शांत कराया। रसूलाबाद कस्बे के बिरहुन गांव निवासी मजदूर राम आसरे के पुत्र लवकुश (तीन माह) गुरुवार से बुखार से पीड़ित था।


 

निजी डॉक्टर से इलाज चल रहा था। शनिवार की सुबह लवकुश की तबियत बिगड़ गई। सुबह करीब 11:00 बजे राम आसरे की पत्नी राम प्यारी बच्चे को लेकर सीएचसी पहुंची। ओपीडी में मौजूद डॉ. पूजा अवस्थी और डॉ. राजेश ने लवकुश की हालत गंभीर देखकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों के फोन करने पर 102 नंबर की एंबुलेंस संख्या 2674 लगभग 11:15 बजे अस्पताल पहुंची।

एंबुलेंस करीब एक किलोमीटर स्थित झींझक रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंची, तभी चालक ने एकाएक गाड़ी रोकी। इसके बाद रामप्यारी को बच्चे समेत एंबुलेंस से उतार दिया। वह एंबुलेंस लेकर चला गया। बेटा तेज बुखार से तप रहा था, उसकी हालत देख रामप्यारी का पसीना छूट रहा था। रामप्यारी ने बेटे की जान की दुहाई देकर कई वाहनों चालकों के सामने गिड़गिड़ाई, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।

 
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आखिर में रामप्यारी बेटे को गोद में लेकर पैदल ही दोपहर करीब 12:45 बजे सीएचसी पहुंची। जब तक वह अस्पताल पहुंचती मासूम की सांसें उखड़ चुकी थी। डॉक्टर ने बच्चे को देखते ही मृत घोषित कर दिया। इससे नाराज परिजनों ने एंबुलेंस वालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया। अस्पताल के प्रभारी और कर्मचारियों ने लापरवाही बरतने वाले एंबुलेंस चालक और मेडिकल टेक्नीशियन पर कार्रवाई कराने का भरोसा देकर आक्रोशित लोगों को शांत कराया। 

108 नंबर को पहुंचने में लगा 30 मिनट
परिजनों का गुस्सा देखकर सीएचसी के कर्मचारियों ने बवाल टालने भरसक कोशिश की। मासूम की मौत के बाद भी उसे जिला अस्पताल भिजवाने के लिए 108 नंबर एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन किया। 108 नंबर एंबुलेंस को अस्पताल पहुंचने में 30 मिनट का वक्त लग गया। तब तक परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। 
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