कानपुर। सियाचिन की भीषण सर्दी में तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) के उपक्रम डीएमएसआरडीई (डिफेंस मटेरियल एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट) ने 280 ग्राम के विशेष दस्ताने तैयार किए हैं, जो माइनस 50 डिग्री तापमान में जवानों के हाथों को सामान्य रखेंगे। इसके साथ ही 180 ग्राम का ट्राउजर और 285 ग्राम की जैकेट सैनिकों को ठंड का एहसास नहीं होने देगी। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक अशोक कुमार गौतम ने बताया कि ट्राउजर और जैकेट को विशेष इनर के साथ पहनना होगा। इसे विशेष फैब्रिक से विकसित किया गया है।
डीएमएसआरडीई के इस विशेष सूट को देखने के लिए छात्रों की भीड़ उमड़ी। मौका था छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित तकनीकी महोत्सव रोबो रंबल-3.0 में लगी डिफेंस एक्सपो का। इस दौरान बुलेट प्रूफ जैकेट, बैलिस्टिक हेलमेट और ब्लास्ट सूट का प्रदर्शन किया गया। 35 ग्राम एपीएनएन के ब्लास्ट में यह सूट जवान को सुरक्षित रखेगा। 10 मीटर दूरी से 9एमएम की पिस्टल से हुए फायर में बैलिस्टिक हेलमेट सुरक्षा प्रदान करेगा। छात्रों ने सिंथेटिक मल्टी स्पेक्ट्रल कैमफ्लेज में रुचि दिखाई, जिसे विशेष फैब्रिक से तैयार किया गया है और यह रडार में पकड़ में नहीं आता।
इसके अलावा सीएसजेएमयू के स्टार्टअप पायरिजन टेक्नोलॉजी ने सेना के लिए ड्रोन विकसित किए है। कंपनी के को-फाउंडर कुलदीप शर्मा और क्षितिज गांधी ने बताया कि उन्होंने दो प्रकार के ड्रोन बनाए हैं। 11 किलो का एटोस-270 ड्रोन तीन किलो भार उठा सकता है और दो घंटे तक 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। यह 50 किमी के सर्कल में सर्विलांस और आत्मघाती मिशन में कारगर है और फिलहाल अंबाला में सेना की देखरेख में ट्रायल चल रहा है। 18 किलो का ऐथर-05 ड्रोन पांच किलो भार उठाकर 15 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से 45 मिनट तक उड़ान भर सकता है और लगभग 25 किमी के क्षेत्र में कार्य करने में सक्षम है। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित रोबोटिक्स शोकेस और प्रदर्शनी में पांच से अधिक टीमों ने नवाचारपूर्ण प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। छात्रों ने रोबो ऑब्स्टकल रेस में भी भाग लिया और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया।