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Income tax Evasion: 275 धन्नासेठों ने की पांच सौ करोड़ की आयकर चोरी, अपराध कोर्ट में वाद दाखिल करने की तैयारी

Fri, 08 Sep 2023 01:57 PM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: आयकर टीडीएस विंग ऐसे डिफॉल्टरों के खिलाफ आयकर अधिनियम की धारा 276 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराने जा रहा है। डिफॉल्टरों के खिलाफ क्रिमिनल प्रक्रिया होने पर जुर्माने के साथ-साथ सजा का भी प्रावधान है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में कर चोरी करने वालों के खिलाफ आयकर विभाग ने अपनी नजर पैनी कर दी है। सीपीसी टीडीएस पोर्टल के जरिये की जा रही निगरानी में कानपुर रीजन में ऐसे 275 धन्नासेठ चिह्नित हुए हैं, जिन्होंने करीब पांच सौ करोड़ रुपये की कर चोरी की है।

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इनमें 90 लोग शहर के हैं। इन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये की कर चोरी की है।  ये लोग शिक्षण संस्थान, सराफा, ऑटोमोबाइल, रियल इस्टेट जैसे कारोबार से जुड़े हुए हैं। विभाग अब इनके खिलाफ स्पेशल चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट आर्थिक अपराध कोर्ट में वाद दाखिल करने की तैयारी में है।
दरअसल, अलग-अलग कारोबार, सर्विस क्षेत्र से जुड़े लोगों को 32 प्रकार से डिडेक्टेड एंड सोर्स (टीडीएस) और टैक्स कलेक्टेड एंड सोर्स (टीसीएस) काटकर जमा करने का प्रावधान है। हालांकि बड़े पैमाने पर लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं। पोर्टल से निगरानी में पता चला है कि संबंधित पर कितनी टीडीएस की देनदारी है।

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डिफॉल्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि जो लोग चिह्नित किए गए हैं, वे लंबे समय से टीडीएस नहीं जमा कर रहे हैं। इन सभी को विभाग पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है। कुछ संस्थानों में सर्वे की भी कार्रवाई की गई है। अब आयकर टीडीएस विंग ऐसे डिफॉल्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने जा रहा है।

कानपुर रीजन में ये जिले
कानपुर नगर के अलावा पश्चिमी उप्र के आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा व एवं उत्तराखंड का देहरादून शामिल है।

आटोमोबाइल क्षेत्र में ऐसे हो रही कर चोरी
10 लाख के वाहन की बिक्री पर शोरूम संचालक को एक प्रतिशत टीसीएस जमा करना होता है लेकिन वो जमा नहीं किया जा रहा है। दरअसल संचालक 10 लाख से कम का बिल कटवाते हैं या पैन न होने का हवाला देकर फार्म 60 भरवा लेते हैं, लेकिन आयकर विभाग में जमा नहीं करते हैं।
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टीडीएस प्रमाण पत्र नहीं देते
उद्योगों-शिक्षण संस्थानों में वैतनिक और गैर वैतनिक लोग काम करते हैं। गैर वैतनिक को जो वेतन दिया जाता है, उस पर 10 फीसदी का टीडीएस काटा जाता है। आयकर रिटर्न दाखिल करने में इसका भुगतान होता है, लेकिन इन क्षेत्रों के लोगों को प्रमाण पत्र नहीं दिए जा रहे हैं। इसी तरह सराफा कारोबारी भी कर्मचारियों को अलग-अलग मदों में वेतन भुगतान कर रहे हैं और टीडीएस नहीं काट रहे हैं।
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