कानपुर। ईरान-इस्रराइल व अमेरिका के बीच युद्ध से डिटर्जेंट में उपयोग होने वाले केमिकल (लीनियर अल्काइल बेंजीन) के दाम बढ़ गए हैं। 122 रुपये प्रतिकिलो मिलने वाला केमिकल अब 270 रुपये तक पहुंच गया है। इस वजह से कानपुर नगर व देहात की 250 फैक्टरियों में डिटर्जेंट पाउडर का उत्पादन बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। उद्यमियों के संगठन पीआईए ने एमएसएमई मंत्री को पत्र लिखकर केमिकल उपलब्ध कराने की मांग की है।
कानपुर नगर व देहात में डिटर्जेंट पाउडर बनाने वाली 500 फैक्टरियां हैं। इनमें नगर में 350 व देहात में 150 फैक्टरियां शामिल हैं। इन फैक्टरियों में हर दिन चार हजार टन पाउडर तैयार किया जाता है। पाउडर में इस्तेमाल होने वाला लीनियर अल्काइल बेंजीन नाम का केमिकल ईरान, कुवैत और सऊदी अरब से आता है लेकिन पिछले कुछ समय से ईरान-इस्रराइल व अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध की वजह से इसका असर शहर आने वाले केमिकल में पड़ रहा है। युद्ध से पहले 120 रुपये प्रतिकिलो व 18 प्रतिशत टैक्स के साथ फैक्टरियों तक पहुंचता था। युद्ध शुरू होने के बाद यह केमिकल 135 रुपये, फिर 150 रुपये प्रतिकलो अब यह 270 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है। केमिकल महंगा होने का सबसे ज्यादा प्रभाव एमएसएमई की फैक्टिरियों में पड़ रहा है। अगर वह केमिकल खरीदकर डिटर्जेंट बनाते हैं तो बाजार में वर्तमान कीमत से दोगुना तक पहुंच जाएगा जबकि बड़ी कंपनियां अपने पुराने दाम पर ही डिटर्जेंट बेच रही हैं। इसका कारण बड़ी कंपनियों व भारत में केमिकल बनने वाली कंपनियों के बीच अनुबंध है। ऐसे में उन्हें तय दाम पर ही केमिकल उपलब्ध हो रहा है। ऐसी स्थिति में कानपुर नगर व देहात में एमएसएमई की 250 फैक्टरियों में उत्पादन बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। इसको देखते हुए पीआईए के प्रांतीय अध्यक्ष मनोज बंका ने एमएसएमई के मंत्री राकेश सचान को पत्र लिखकर समस्या के समाधान की मांग की है।
100 किलो डिटर्जेंट पाउडर में 10 से 15 प्रतिशत लीनियर अल्काइल बेंजीन को मिलाया जाता है। इसी केमिकल की वजह से पाउडर में झाग बनता और कपड़ों की सफाई होती है। अगर यह पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलाया गया तो पाउडर काम नहीं करेगा।
एक नजर फैक्टरियों पर
कानपुर नगर- 350 फैक्टरी
देहात- 150
उत्पादन- चार हजार टन प्रतिदिन
प्रभावित कारोबार- 122 करोड़
ईरान-इस्रराइल व अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध की वजह से केमिकल बहुत महंगा हुआ है। इस वजह से डिटर्जेंट पाउडर बनाना मुश्किल हो गया है। फैक्टरी बंद होने के कगार पर है। - मिक्की मनचंदानी, कारोबारी, डिटर्जेंट पाउडर
लीनियर अल्काइल बेंजीन के बिना डिटर्जेंट पाउडर अधूरा है। यह महंगा होने की वजह से छोटी व बड़ी 250 फैक्टरियां बंद हो गई हैं। सरकार को हस्तक्षेप कर समाधान कराना चाहिए। - भगवान दास शिवानी, कारोबारी, डिटर्जेंट पाउडर
वहीं, रनियां (कानपुर देहात) में युद्ध से डिटर्जेंट उद्योग डगमगा गया है। उद्यमियों का कहना है कि डिटर्जेंट बनाने में प्रयोग होने वाले केमिकल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे कीमत ढाई गुनी हो गई है। करीब 150 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो गया है।
रनियां व जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में पाउडर बनाने की करीब 150 फैक्टरियां संचालित हैं। इनमें उत्पादन 60 से 70 प्रतिशत तक घट गया है। हालात यह हैं कि पिछले तीन-चार दिन से कई इकाइयों में उत्पादन क्षमता का केवल 30 प्रतिशत काम हो पा रहा है। इससे करीब 150 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ा है। उद्यमियों के अनुसार अभी तक इन इकाइयों में प्रतिदिन करीब 20 से 30 करोड़ रुपये के डिटर्जेंट पाउडर और लिक्विड साबुन का उत्पादन होता है।
लघु उद्योग भारती के महामंत्री/उद्यमी हिमांशु सिंह ने बताया कि नहाने वाले साबुन को ताड़ की गिरी के तेल या नारियल के तेल को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कास्टिक सोडा) के साथ बनाकर तैयार किए जाता है। यह फैटी एसिड के सोडियम लवण होते हैं। वनस्पति तेल (80-90%) ताड़ की गिरी का तेल सबसे अहम है। क्षार/कास्टिक सोडा तेलों को साबुन में बदलने के लिए साबुनीकरण किया जाता है। नारियल/कर्नेल तेल का मिश्रण अच्छी कठोरता और झाग के लिए उपयोग किया जाता है।
उद्यमियों के मुताबिक इसमें कम ग्रेड के तेल के साथ-साथ सोडियम सिलिकेट और काओलिन जैसे फिलर्स का उपयोग किया जाता है। इस समय इसकी आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं हो पा रही है।
युद्ध के कारण सबसे ज्यादा असर प्लास्टिक के दाने और डिटर्जेंट में प्रयोग होने वाले केमिकल पर पड़ा है। दोनों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इससे रनियां और जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों में उत्पादन घट गया है और कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। - हिमांशु सिंह, महामंत्री लघु उद्योग भारती
युद्ध के कारण डिटर्जेंट में प्रयोग होने वाला केमिकल और अन्य कच्चा माल महंगा हो गया है। इससे उत्पादन प्रभावित है और लघु उद्योग संकट में हैं। केमिकल के दाम दोगुने होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। फैक्टरी में डिटर्जेंट और प्लास्टिक दोनों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। - उदय वीर, उद्यमी