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Kanpur News: दहशत के 25 मिनट, हलक में अटकी रहीं यात्रियों की जान

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कानपुर। नासिक से तीर्थ पर निकले 57 यात्रियों की यात्रा 14 मार्च की सुबह जिंदगी भर न भूलने वाली बन गई। भीषण टक्कर से हुए धमाके के साथ गहरी नींद में अपनी सीट पर सोए यात्री तेज झटके के साथ एक के ऊपर एक गिर पड़े। आंख खुली तो सामने मौत नाचती दिखी। बस के अंदर चीखपुकार, अफरातफरी मच गई। हर कोई जान बचाने के लिए बस से बाहर निकलने की जद्दोजहद में जुट गया। बस में सवार 57 यात्रियों में से 55 खुशनसीब थे जिनकी जान बच गई। किसी ने अपनी कोहनी तो किसी ने घुटनों से खिड़कियों के शीशे तोड़ने की नाकाम कोशिश की। 25 मिनट तक बस में फंसे यात्रियों जान उनके हलक में अटकी रही। हादसे के 25 मिनट बाद मौके पर नजर आई रेस्क्यू टीम को देख यात्रियों ने राहत की सांस ली। यह कहना था बस में सवार नासिक के भास्कर चौधरी और उनकी पत्नी संगीता का।
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भास्कर और संगीता ने बताया कि पूरा टूर 10 दिन का था। गुरुवार को वे लोग नासिक से निकले थे। शुक्रवार को महाकाल उज्जैन में दर्शन करने के बाद रात करीब दो बजे भिंड नेशनल हाईवे पर स्थित एक ढाबे में सभी ने खाना खाया। इसके कुछ देर बाद बस चल पड़ी और सभी लोग सो गए। शनिवार सुबह तेज गति में बस सीधे ट्राला में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि गहरी नींद में सोते समय लोग एक दूसरे पर गिरे। किसी का हाथ टूटा तो किसी का पैर। वहीं टकराने में सिर फट गया। इसी तरह तीर्थयात्री मीरा बाई, अलका, मंदा और सरला ने बताया कि उनकी यह यात्रा कभी न भूलने वाली याद बनकर रह गई।
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सिलिंडर फटते तो जातीं कई जानें
10 दिन के टूर में तीर्थयात्री अपने पूरे बंदोबस्त से निकले थे। मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा ने बताया कि रेस्क्यू टीम ने बस में फंसे हुए घायलों को निकालने के बाद जब लगेज को निकालना शुरू किया तो बस में दो सिलिंडर भी रखे मिले। बताया अगर हादसे के दौरान सिलिंडर फट जाते तो कई तीर्थयात्रियों की जान जा सकती थी।
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