कानपुर देहात। अकबरपुर मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट अब भी खराब पड़ी है। जिम्मेदार बार-बार गोलमोल जवाब देकर बच रहे हैं। बीती 26 मार्च को अमर उजाला ने मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट खराब होने का मुद्दा उठाया था। लिफ्ट खराब होने की बात जब प्राचार्य से की गई तो उन्होंने लिफ्ट की खामी दूर करा शीघ्र इसे चालू कराने की बात कही थी। 24 दिन बीत गए हैं अब तक लिफ्ट ठीक नहीं हो सकी है।
बता दें कि लिफ्ट खराब होने के चलते कराहते हुए मरीज ओपीडी तक पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग, बीमार व हड्डी रोग के मरीजों को हो रही है। वहीं, चौथे तल स्थित जनरल वार्ड में भर्ती मरीज व उनके तीमारदार भी परेशान हैं। इधर अब जिम्मेदार एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट के तहत जल्द लिफ्ट ठीक कराने की बात कह रहे हैं। पिछली बार की तरह एक बार फिर उन्होंने रटा-रटाया बयान दिया है।
मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर मेडिकल कॉलेज में इन दिनों ओपीडी में एक हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। शनिवार को सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक 1010 मरीजाें ने अपनी पंजीकरण कराया था। इनमें उल्टी दस्त, बुखार के साथ हड्ड़ी रोग के भी मरीज शामिल थे। इलाज के लिए पहुंचे मरीज रैंप से चढ़ने-उतरने में कराहते हुए नजर आए। कई मरीज अस्पताल कर्मियों से मदद के लिए स्ट्रेचर व व्हील चेयर भी मांगते दिखे। अस्पताल आए मरीजों व स्टॉफ ने बताया कि 20 मार्च से पंजीकरण काउंटर के सामने मरीजों व तीमारदारों के लिए लगी लिफ्ट खराब है। उसके न चलने से मरीज रैंप से आ जा रहे हैं। रैंप के सहारे ही मरीज ओपीडी व जनरल वार्ड, ओटी तक जाते हैं। कई मरीजों के तीमारदारों ने बताया कि रैंप से आने-जाने में दम फूल जाता है। मदद के लिए कर्मचारी भी आगे नहीं आते।
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बोले मरीज...
केस-1
बेटे जैत का पैर टूट जाने के कारण उसको दिखाने के लिए 11 बजे के करीब अस्पताल आए थे। पर्चा बनवाने के बाद बताया गया कि ऊपर जाकर दिखाना पड़ेगा। लिफ्ट बंद थी तो किसी तरह बेटे को गोद में लेकर ऊपर तक पहुंचे। यहां आने पर उसे एक्स-रे के लिए भेज दिया गया। किसी तरह फिर रैंप से नीचे आए। गोद में बच्चे को लेकर आने में परेशानी हुई। लिफ्ट चलती तो आसानी होती। - राबिया, जलालपुर
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केस-2
मां शिवकली को दिखाने के लिए आए थे। पर्चा बनवाने के बाद कमरा नंबर पांच में भेजा गया। यहां आने पर बताया गया कि एक्स-रे बाहर से कराकर लाना पड़ेगा। लिफ्ट न चलने के कारण दो बार मां को स्ट्रेचर में लिटाकर ले गए और उतार कर स्वयं ही लाना पड़ा। एक्स-रे भी नहीं हो सका। मजबूरी थी इसलिए स्वयं स्ट्रेचर खीचना पड़ा। - महेंद्र सिंह, कठेठी, गजनेर
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नए भवन में लिए जाने लगे सैंपल, यहीं से मिल रही रिपोर्ट
मेडिकल कॉलेज के नए भवन व पुराने भवन के बीच करीब 400 मीटर की दूरी है। नए भवन में करीब एक साल से ओपीडी चल रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों की अभी तक खून की जांच पुराने भवन के प्रथम तल में बनी पैथोलॉजी में जांचे की जाती थी। मरीजाें को जांच के लिए पुराने भवन जाना पड़ता था। इससे समय टूटता था और गंभीर बीमार मरीज को आने-जाने के साथ डॉक्टर को दिखाने के लिए परेशान होना पड़ता था। मरीजों की सुविधा को देखते हुए पंजीकरण काउंटर के सामने कक्ष में पैथोलॉजी का संचालन शुरू करा दिया गया है। यहां मशीनें चालू करा दी गई हैं। स्टॉफ की तैनाती भी की गई है। प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह ने बताया कि अभी 25 फीसदी सैंपलिंग हो रही है। धीरे-धीरे इसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। पूरी क्षमता में पैथोलॉजी के कार्य करने पर पुराने भवन की पैथोलॉजी को भी इसी में शिफ्ट किया जाएगा। जिससे मरीजों को जांच के लिए भटकना न पड़े।
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वर्जन.................
एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट के तहत लिफ्ट ठीक कराई जानी है। इसकी प्रक्रिया कराई जा रही है। जल्द ही लिफ्ट ठीक करा दी जाएगी। जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों को ओपीडी, ओटी, जनरल वार्ड तक आने-जाने में परेशानी न हो। लिफ्ट के पास व्हील चेयर, स्ट्रेचर रखे हुए हैं। कर्मचारियों को सख्त निर्देश हैं कि शारीरिक रूप से कमजोर व बीमार मरीज को उनकी मदद करें। मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए कार्य किए जा रहे हैं। मरीज को खून जांच के लिए पुराने भवन में जाना पड़ता था। इसलिए पंजीकरण के सामने पैथोलॉजी में ब्लड कलेक्शन व रिपोर्ट देने का काम भी शुरू करा दिया गया है। इसका आगे जल्द विस्तार भी किया जाएगा। - डॉ. हरप्रीत सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अकबरपुर