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किदवई नगर मंडी के 227 प्लॉटों की फाइलें गायब

Tue, 30 Dec 2014 03:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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केडीए की किदवई नगर सब्जी मंडी की ओरिजनल फाइल और 227 प्लॉटों के दस्तावेज गायब हो गए हैं। इन प्लॉटों की कीमत 40 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। इस हेराफेरी में केडीए कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है।
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मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती की कोशिश की जा रही है। बादशाहीनाका सब्जी मंडी को शिफ्ट करने के लिए केडीए ने 25 जून 1976 को किदवई नगर ओ-ब्लाक सब्जी मंडी योजना लांच की थी।

उस समय यह एशिया की सबसे बड़ी, आधुनिक एवं सुनियोजित फल एवं सब्जी मंडी बताई गई थी। इसमें लगभग 150 - 150 वर्गमीटर के 730 बड़े प्लॉट और 12 - 12 वर्गमीटर के 547 छोटे प्लॉट विकसित किए गए थे।
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आगे की तरफ सामुदायिक केंद्र, कोल्ड स्टोर और पीछे की तरफ पांच हजार वर्ग मीटर पर ठेला पार्किंग के लिए जमीन आरक्षित की गई थी। फायर ब्रिगेड के लिए भी जगह दी गई थी। उस समय यहां के आठ सौ से ज्यादा प्लॉट सब्जी और फल विक्रेताओं को आवंटित किए गए।

बाद में भी कुछ प्लॉट आवंटित किए गए, पर अभी भी सैकड़ों प्लॉट खाली पड़े हैं। इस मंडी की वजह से आसपास के क्षेत्रों में गंदगी, ट्रकों की आवाजाही से जाम, हादसों का हवाला देते हुए 1998 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

एडवोकेट कमिश्नर मुनीर की रिपोर्ट के बाद 7 जुलाई 2003 को हाईकोर्ट ने इस मंडी को तत्काल शिफ्ट करने का आदेश दिया। 20 दिसंबर 2008 को केडीए बोर्ड में प्रस्ताव संख्या - 99/4 के तहत मंडी को चकरपुर में शिफ्ट करने का आदेश पारित हुआ।

इसी आदेश के तहत किदवई नगर सब्जी मंडी को व्यवसायिक से आवासीय कर दिया गया। मंडी शिफ्ट होने के बाद 30 दिसंबर 2012 को केडीए ने इस मंडी में खाली पड़े प्लॉटों के संबंध में विज्ञापन जारी किया, पर प्लॉट नहीं बेचे।

धीरे - धीरे खाली पड़े सैकड़ों प्लॉटों के साथ ही पार्कों से लेकर सड़क तक भूमाफियाओं, दबंगों ने अवैध कब्जा कर लिया। वहां कबाड़ और प्लास्टिक फैक्ट्रियां बन गईं।

इतना ही नहीं भूमाफिया, सफेदपोश और केडीए कर्मियों के काकस ने इस मंडी में शुरुआती आवंटन के दौरान बने ले-आउट की मूलप्रति से लेकर 227 प्लॉटों की फाइलें तक गायब कर दी हैं।

यह काकस इन प्लॉटों को एक - एक कर पुराने रेट पर आवंटित कराने की कोशिश कर रहा है।

बोले, जिम्मेदार

यह सच है कि किदवई नगर सब्जी मंडी की ओरिजनल फाइल नहीं मिल रही है। उसी से क्लियर होगा कि कौन - कौन सा प्लॉट किसे - किसे आवंटित है।

कौन - कौन से प्लॉट खाली हैं। जहां तक 227 प्लॉटों के दस्तावेज गायब होने की बात है तो संभव है कि वे प्लॉट किसी को आवंटित न हुए हों और उन्हें पुरानी दर पर आवंटित कराने की साजिश रची जा रही हो। इंजीनियरिंग सेक्शन से मंडी का सर्वे करा रहे हैं।

इससे पता चलेगा कि कौन से प्लॉट किसे आवंटित है और कौन खाली हैं। यदि ऐसे भी नहीं पता चला तो विज्ञापन निकालेंगे कि ये प्लॉट किसी को आवंटित तो नहीं हैं। यदि हों तो आवंटी बताएं, वरना उन्हें खाली मान लिया जाएगा।
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- सीताराम सोमकमल, उप सचिव एवं प्रभारी सब्जी मंडी योजना
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