मेरठ। 18 जुलाई 2018 से 15 जनवरी 2019 के बीच केवल दो दिन ही शहनाई बज पाएंगी। क्योंकि अन्य दिनों में शादी का कोई शुभ मुहूर्त ही नहीं है। दो दिनों में केवल 21 जुलाई को भडेरिया नवमी और 19 नवंबर को देवोत्थान एकादशी को ही अनसूझ शादी हो सकेंगी। चातुर्मास, गुरु ग्रह अस्त होने और खरमास के चलते 15 जनवरी 2019 के बाद मांगलिक कार्य शुरू हो पाएंगे।
ज्योतिषी पं. विनोद त्यागी का कहना है कि सनातन धर्म में भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्व है। ऐसे में जब विष्णु क्षीर सागर में रहते हैं, उस चार महीने के समय को हम चातुर्मास कहते हैं। इस दौरान सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाते हैं। इस वर्ष 23 जुलाई 2018 को देवशयनी एकादशी होगी और चातुर्मास शुरू हो जाएंगे। इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाएंगे। 19 नवंबर 2018 को देवोत्थान एकादशी के साथ चातुर्मास खत्म हो जाएंगे। इसके बाद भी मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ नहीं हो पाएंगे क्योंकि गुरु ग्रह अस्त हो जाएंगे। इनका कहना है कि गुरु 12 नवंबर 2018 को अस्त हो जाएंगे। इसके बाद 10 दिसंबर को उदय होंगे। ऐसे में देव गुरु बृहस्पति की पूजा के बिना कोई भी विवाह कार्यक्रम नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 10 से 15 दिसंबर तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। 15 दिसंबर को खरमास प्रारंभ हो जाएगा जो कि 15 जनवरी 2019 तक चलेगा। ऐसे में विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं होगा। कारण है कि खरमास में भी मांगलिक कार्यक्रम नहीं होते हैं।
खास बातें:
इस वर्ष 21 जुलाई को भडेरिया नवमी और 19 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर अनसूझ होंगी शादी
इन दो दिनों को छोड़कर बाकी दिनों में नहीं कोई शादी का शुभ मुहूर्त
चातुर्मास और गुरु ग्रह के अस्त होने से नहीं होंगे मांगलिक कार्य