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पानी-बिजली न मिलने पर इंजीनियरिंग छात्रों का हंगामा

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अमर उजाला ब्यूरो
तिर्वा।
राजकीय इंजीनियरिंग कालेज अपने प्रथम शैक्षिक सत्र से ही अव्यवस्थाओं का शिकार है। कैंपस में पिछले तीन दिन से बिजली की अघोषित कटौती, टंकी से पानी न आने, क्लास रूम में बिजली गुल रहने की समस्याओं से जूझ रहे छात्रों ने शुक्रवार को कक्षाओं का बहिष्कार कर धरना दिया। छात्रों को समझाने के लिए निदेशक नीलम श्रीवास्तव ने काफी प्रयास किए, पर छात्र नहीं माने। पूरे दिन छात्रों का धरना चला।
इंजीनियरिंग कालेज की कक्षाएं अभी तक एचबीटीआई कानपुर के कैंपस में चल रही थी। शासन के प्रयास के बाद एक सितंबर से तिर्वा इंजीनियरिंग कालेज में कक्षाएं शुरू हुई। मौजूदा समय में बीटेक प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष, तृतीय वर्ष के 550 स्टूडेंटस अध्ययन कर रहे हैं। इनमें बीटेक द्वितीय वर्ष के 150 स्टूडेंट्स को हास्टल आवंटित नहीं हुआ है। दो छात्रावासों का निर्माण अभी अधूरा है। कैंपस में पानी की टंकी तो बनी है, पर मोटर खराब होने से तीन दिन से सप्लाई ठप है। इंजीनियरिंग कालेज के लिए अलग से फीडर न होने के कारण अक्सर बिजली गुल रहती है। इन्हीं समस्याओं से आजिज करीब 300 छात्रों ने शुक्रवार को सुबह 9.30 बजे क्लास का बहिष्कार कर दिया। निदेशक कार्यालय के सामने सभी छात्र पानी-बिजली की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए। करीब एक घंटे बाद निदेशक नीलम श्रीवास्तव धरना स्थल पर पहुंची। करीब आधा घंटे तक छात्रों को समझाने का प्रयास किया, पर छात्र नहीं माने। दोपहर दो बजे तक सभी छात्र धरने पर बैठे रहे। छात्रों के मुताबिक कैंपस में गंदगी से पिछले एक सप्ताह से तृतीय वर्ष के छात्र अनुभव, प्रथम वर्ष के तहसीन व प्रथम वर्ष के अनूप व अभिषेक सिंह, द्वितीय वर्ष के अभिषेक राय व द्वितीय वर्ष के ही सत्यम बीमार चल रहे हैं। मेडिकल कालेज में इनका इलाज हो रहा है।
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लाइब्रेरी बंद, खाने की गुणवत्ता भी खराब
तिर्वा। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ट्रेड के तृतीय वर्ष के छात्र अमित कुमार ने बताया कि कालेज की लाइब्रेरी अक्सर बंद रहती है। जिससे स्टूडेंटस को स्टडी करने में दिक्कत आती है। रात्रि के समय अक्सर बिजली गुल हो जाती है। जिससे परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। इलेक्ट्रिकल तृतीय वर्ष के छात्र नीरज कुमार का कहना है कि हास्टल में मेस संचालित है, पर खाने की क्वालिटी काफी घटिया है। कई बार शिकायत की पर कोई सुधार नहीं हुआ। इससे छात्रों की सेहत खराब हो रही है। कंप्यूटर साइंस प्रथम वर्ष के छात्र प्रणव शाहू का कहना है कि कैंपस में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। ब्वायज हास्टल के सामने नालियां चोक हैं। काफी गंदगी है, जिससे हास्टल में रहने वाले करीब आधा दर्जन छात्र बीमार चल रहे है। इलेक्ट्रानिक प्रथम वर्ष के छात्र सोहल इकबाल ने बताया कि बिजली चली जाने पर क्लास रुम में रुकना मुश्किल हो जाता है। कैंपस में जनरेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। क्लास रुम में भी इन्वर्टर नहीं लगाए गए हैं। जिस वजह से छात्र परेशान हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग तृतीय वर्ष के छात्र अंकित कुमार ने बताया कि पिछले तीन दिनों से टंकी का मोटर फुंक जाने से कैंपस में पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। टायलेट व स्नान के लिए उन्हें कैंपस के बाहर लगे हैंडपंप से बाल्टियों में पानी लेकर आना पड़ता है। काफी समय बर्बाद हो रहा है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष के छात्र राजकुमार मौर्या ने बताया कि पानी-बिजली, हास्टल व मेस की समस्याओं को लेकर उन्होंने कई बार निदेशक को अवगत कराया। इसके बावजूद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। मजबूरन छात्रों को आज धरने पर बैठना पड़ा।
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बजट के अभाव में सामने आ रही समस्यायें
तिर्वा। राजकीय इंजीनियरिंग कालेज की निदेशक नीलम श्रीवास्तव का कहना है कि छात्रों की समस्याएं जायज हैं। बजट के अभाव में जनरेटर व इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। कालेज में अलग फीडर के लिए उन्होंने विद्युत विभाग में धन जमा कर रखा है। कई बार डीएम व अधिशाषी अभियंता से बात भी हुई है। टंकी का मोटर फुंक गया है। यह जिम्मेदारी कार्रदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम की है। संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को शिकायत की जा चुकी है। जल्द ही मोटर दुरुस्त कराई जाएगी।

पानी-बिजली न मिलने पर इंजीनियरिंग छात्रों का हंगामा
-क्लास का बहिष्कार कर पांच घंटे धरने पर बैठकर जताया विरोध, निदेशक के समझाने पर भी नहीं माने
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