अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। मौरंग की किल्लत से रुके पड़े निर्माण कार्यों के जल्द शुरू होने की उम्मीद बंधी है। सोमवार राजस्थान से मौरंग की रैक मालगाड़ी से सोनिक रेलवे स्टेशन पर उतरी है। 58 डिब्बों में 3828 टन मौरंग मंगाई गई है। हालांकि प्राथमिकता में पहले सरकारी फर्में है। यहां से बचने के बाद बाजार में बिके गी।
सरकार ने अवैध मौरंग खनन और ओवर लोडिंग पर शिकंजा कस रखा है। जिससे बाजार में मौरंग के दाम आसमान पर हैं और मारामारी की स्थिति है। वहीं मौरंग डंप किए व्यवसाई मनमाने दाम ले रहे हैं। जिले के लोगों को मौरंग की किल्लत से राहत मिलने की उम्मीद है।
कानपुर की लवली ट्रेडर्स लिमिटेड ने राजस्थान के सवई माधवपुर से मौरंग की बड़ी खेप सोनिक रेलवे स्टेशन पर मंगवाई है। सोमवार सुबह रैक पहुंची और जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी हुई तो निर्माण करा रहे या निर्माण कराने की सोंच रहे आम लोगों के साथ ही कार्यदायी विभागों के अफसरों को मौरंग की किल्लत और मनमाने दाम से निजात मिलने की उम्मीद नजर आई है। ठेकेदार मो. युनूस सिद्दिकी
ने बताया कि मौरंग की कमी से कई सरकारी प्रोजेक्ट अधर में लटके हैं। वहीं भवन निर्माण करा रहे सामान्य व्यक्ति के लिए भी मौरंग बड़ी मुसीबत बनी हुई है। मौरंग की कमी को कुछ हद तक दूर करने के लिए राजस्थान से मौरंग मालगाड़ी से मंगाई गई है। पहली खेप में 58 डिब्बों में 3828 टन मौरंग आई है। जो जीएसटी
के साथ ही रॉयल्टी पेड है। बताया कि मार्केट में सौ फिट मौरंग 13 हजार रुपये तक बिक रही है। जबकि रैक में आई मौरंग में सारे खर्च निकाल कर डंपिंग स्टेशन से 2200 रुपये टन के हिसाब से और दस किमी के दायरे में डिलीवरी देने पर 2300 रुपये टन पड़ेगी। रैक की पचास फीसदी मौरंग सरकारी कार्यों में सप्लाई दी जाएगी।
राजस्थान से आई मौरंग की रैक, निर्माण कार्यों को मिलेग गति
सोनिक रेलवे स्टेशन के यार्ड में उतारी गई 3828 टन मौरंग की खेप
पचास फीसदी मौरंग सरकारी कार्यों में होगी प्रयोग, बची बाजार में बिकेगी