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UP cpmt : OBC quota in 2015 Students by the SC quota admission papers found

Tue, 07 Jul 2015 02:15 AM IST
संतोष सिंह, कानपुर
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केस-1
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रितिका पाल पुत्री राम शंकर पाल (रोल नंबर 486161, अप्लीकेशन नंबर 136261, जन्म तिथि 5 अगस्त 1988) ने वर्ष 2012 में ओबीसी कोटे से सीपीएमटी का पेपर दिया था। कंबाइंड जनरल रैंक 5030 और कैटेगरी रैंक (ओबीसी) 2298 हासिल करके सीपीएमटी की काउंसलिंग भी कराई लेकिन एमबीबीएस में एडमिशन नहीं मिला। ओबीसी कैटेगरी की इसी स्टूडेंट ने इस बार 2015 में एससी कोटे (रोल नंबर 35170426, रजिस्ट्रेशन नंबर 010132214, जन्म तिथि 5 अगस्त 1988) से सीपीएमटी का पेपर दे दिया। एससी कोटे का लाभ यह हुआ कि रितिका पाल की कैटेगरी रैंक 48 आ गई और उसे किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ की एमबीबीएस सीट पर एडमिशन मिल गया। सवाल यह है कि 2012 में रितिका पाल ओबीसी कोटे की स्टूडेंट थी तो 2015 में एससी कोटे की स्टूडेंट कैसे बन गई। एससी कोटे से पेपर देने वाली रितिका की कंबाइंड जनरल रैंक 4119 थी लेकिन कोटे का बड़ा लाभ मिला और उसे एमबीबीएस में एडमिशन मिल गया। यही नहीं वर्ष 2012 में ओबीसी कोटे से पेपर देने वाली रितिका को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (जूलोजी, बॉटनी) में 145 मार्क्स मिले थे लेकिन एडमिशन नहीं मिल सका। इस बार 133 मार्क्स पाकर एमबीबीएस में एडमिशन पा गई हैं।



केस-2
जय प्रकाश पाल पुत्र वासुदेव पाल (रोल नंबर 418132, अप्लीकेशन नंबर 129637, जन्म तिथि 12 अक्तूबर 1989) ने वर्ष 2012 में ओबीसी कोटे से सीपीएमटी का पेपर दिया। कंबाइंड जनरल रैंक 13889 और कैटेगरी रैंक (ओबीसी) 6032 हासिल करके सीपीएमटी की काउंसलिंग भी कराई लेकिन एमबीबीएस में एडमिशन नहीं मिल सका। ओबीसी कैटेगरी के इसी स्टूडेंट ने इस बार 2015 में एससी कोटे (रोल नंबर 28080370, रजिस्ट्रेशन नंबर 010084486 जन्म तिथि 12 अक्तूबर 1989) से सीपीएमटी का पेपर दिया। इसका लाभ यह हुआ कि जय प्रकाश पाल की कैटेगरी रैंक 559 आ गई और उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन की एमबीबीएस सीट पर एडमिशन मिल गया। यहां भी सवाल यह कि 2012 में जय प्रकाश पाल ओबीसी कैटेगरी का स्टूडेंट था तो 2015 में एससी कैटेगरी में कैसे आ गया। एससी कोटे से पेपर देने वाले जय प्रकाश पाल की कंबाइंड जनरल रैंक 12333 थी लेकिन कोटे का बड़ा लाभ मिला। यही नहीं वर्ष 2012 में ओबीसी कोटे से पेपर देने वाले जय प्रकाश को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (जूलोजी, बॉटनी) में 111 मार्क्स मिले थे लेकिन एडमिशन नहीं मिला। इस बार 113 मार्क्स पाकर एमबीबीएस में एडमिशन पा गए हैं।
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केस-3
सुनील कुमार पाल पुत्र पारसनाथ पाल (रोल नंबर 474112, अप्लीकेशन नंबर 122751 और जन्म तिथि 25 अक्तूबर 1990) ने वर्ष 2012 में ओबीसी कोटे से सीपीएमटी का पेपर देकर कंबाइंड जनरल रैंक 13889 और कैटेगरी रैंक (ओबीसी) 6032 हासिल की और ऑनलाइन काउंसलिंग भी कराई लेकिन अच्छे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल सका। ओबीसी कैटेगरी के इसी स्टूडेंट ने इस बार 2015 में एससी कोटे (रोल नंबर 34220490, रजिस्ट्रेशन नंबर 010016836 और जन्म तिथि 25 अक्तूबर 1990) से सीपीएमटी का पेपर दिया। सुनील की कैटेगरी रैंक 483 मिली और उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन की एमबीबीएस सीट पर एडमिशन मिल गया। यहां भी सवाल यह कि 2012 में सुनील कुमार पाल ओबीसी कैटेगरी का स्टूडेंट था तो 2015 में एससी कैटेगरी में कैसे आ गया। एससी कोटे से पेपर देने वाले सुनील कुमार पाल की कंबाइंड जनरल रैंक 11715 थी लेकिन कोटे की अच्छी रैंक की बदौलत एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एडमिशन पाने ूमें सफल रहे। वर्ष 2012 में ओबीसी कोटे से पेपर देने वाले सुनील को को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (जूलोजी, बॉटनी) में 121 मार्क्स मिले थे लेकिन एडमिशन नहीं मिल सका था। इस बार 114 मार्क्स पाकर एमबीबीएस की सीट पा गए हैं।

व्यापमं घोटाले की चर्चा के बीच उत्तर प्रदेश कंबाइंड प्री मेडिकल टेस्ट (यूपी सीपीएमटी) 2015 भी फर्जीवाड़े के आरोपों से घिर गया है। इसमें आरक्षण का गलत लाभ देकर तमाम स्टूडेंटों को राजकीय मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस सीट पर एडमिशन दे दिया गया है। जिन स्टूडेंटों ने वर्ष 2012 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से सीपीएमटी का पेपर दिया, काउंसलिंग कराई और कमजोर रैंक की वजह से एडमिशन नहीं पा सके, वही इस बार अनुसूचित जाति (एससी) से पेपर देकर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) लखनऊ में एडमिशन पा गए हैं। इन स्टूडेंटों के नाम, पिता के नाम और जन्म तिथि एक हैं। एक जनहित याचिका के जरिए इस गोलमाल की पूरी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सीपीएमटी का पेपर नए सिरे से कराए जाने की मांग भी की गई है। इससे संबंधित जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर ली है।
सीपीएमटी 2015 के पहले चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग के रिजल्ट आठ जून 2015 को घोषित हुए हैं। जिन स्टूडेंटों ने काउंसलिंग कराई थी, उन सबको कॉलेज और उनकी एमबीबीएस, बीडीएस की सीटें आवंटित कर दी गई हैं। अब स्टूडेंट एडमिशन ले रहे हैं। इससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाले बृजेश मौर्या ने एमबीबीएस, बीडीएस की काउंसलिंग और एडमिशन में आरक्षण का गलत लाभ दिए जाने का बम फोड़ दिया। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्ष 2012 में ओबीसी कैटेगरी से सीपीएमटी का पेपर देने और काउंसलिंग कराने वाले 15 स्टूडेंट ऐसे हैं, जो कि एससी कैटेगरी का लाभ लेकर केजीएमयू लखनऊ, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर, राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन और राजकीय मेडिकल कॉलेज सहारनपुर में एडमिशन पा गए हैं। सबको एमबीबीएस की सीट मिली है, जो कि अच्छे रैंक वाले स्टूडेंट को मिल पाती है। दरअसल, स्टूडेंटों ने अपनी ओबीसी कैटेगरी बदलकर एससी कर दी और इसी के सहारे एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन ले लिया। नियमानुसार यह संभव नहीं है। एससी कोटे में ओबीसी का सेलेक्शन गलत है। जिन स्टूडेंटों ने आरक्षण का गलत लाभ लिया है, उनमें से ज्यादातर ने एडमिशन की ऑनलाइन काउंसलिंग जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर से कराई है। इनके नाम, पिता के नाम और जन्म तिथि समान हैं, इनका ब्यौरा मिल गया है लेकिन निवास स्थान की जानकारी नहीं मिली है। इसकी खोजबीन कराई जा रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस खेल में बड़ा गिरोह सक्रिय है। गिरोह का काम राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का ठेका लेना है। साथ ही किसी तरह एमबीबीएस या बीडीएस में एडमिशन दिलाना है।
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कोट
पाल बिरादरी ओबीसी में आती है। इस कैटेगरी के स्टूडेंट एससी कोटे का लाभ नहीं ले सकते हैं। यदि ऐसा हुआ है तो गलत है। पहले ओबीसी, फिर एससी कैटेगरी पर पेपर देना और एडमिशन लेना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें शामिल स्टूडेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। एडमिशन भी निरस्त किया जा सकता है।
                शत्रुघ्न सिंह, एडीएम फाइनेंस कानपुर नगर
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