कानपुर। जेके जूट मिल की संपत्तियों पर मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह में निर्णय हो सकता है। बिड में शामिल कंपनियों को 31 मार्च तक 25 फीसदी रकम जमा करनी होगी। ये वे कंपनियां हैं जिनकी सबसे ऊंची बोली होगी। सिक्योरिटी मनी पूर्व में बिड में शामिल कंपनियां जमा कर चुकी हैं। एनसीएलटी के आदेश पर कोर्ट मजिस्ट्रेट और इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (आईआरपी) ने मिल की संपत्तियों की नापजोख कराई है। सोमवार को रिपोर्ट पेश की जाएगी।
मिल की संपत्तियों पर सिंहानिया ग्रुप की यदु इंटरनेशनल, गोविंद सारडा के भाई घनश्याम सारडा की कंपनी समेत छह कंपनियों ने रुचि दिखाई है। मिल की कानपुर और बिहार में संपत्तियां हैं। मार्च 2014 से जेके जूट मिल कानपुर में तालाबंदी है। मिल का मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में चल रहा है। आईआरपी ने पिछले साल मिल की संपत्तियों पर कब्जा भी ले लिया था। जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा के महामंत्री राजू प्रसाद ने बताया कि एनसीएलटी की ओर से नियुक्त आईआरपी और कोर्ट मजिस्ट्रेट की निगरानी में जेके जूट मिल की संपत्तियों की नापजोख कराई गई है।
2018 में आईडीबीआई बैंक ने कानपुर और बिहार में इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 345 करोड़ रुपये आंकी थी। अब कीमत करीब 700 करोड़ है। उन्होंने बताया कि बिड में सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को 31 मार्च तक 25 प्रतिशत रकम जमा करानी होगी। संपत्तियों के संबंध में रिपोर्ट सोमवार को पेश की जा सकेगी। यदि बिड कंपनी रकम नहीं जमा कराती है तो अगले 15 दिन में दूसरी बिड निकाली जाएगी। मिल के 2000 के करीब कर्मचारियों का 132 करोड़ के बकाया भुगतान होने की उम्मीद जगी है।