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अस्पतालों में दवाओं का टोटा, मरीज बेहाल

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उन्नाव। जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का अकाल पड़ गया है। स्वास्थ्य केंद्रों में पैरासीटामाल के अलावा इंफेक्शन की दवा इंटीफंगल भी उपलब्ध नहीं है। गैस संबंधी दवाएं भी नदारत हैं।
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एक्सीडेंटल मामलों में लगाया जाने वाला मलहम व दर्द की दवा भी नहीं है। डाक्टर दवाएं बाहर से लिख रहे हैं। यह स्थित इसलिए है कि जीएसटी लगने के बाद से अभी तक दवा की सप्लाई ही नहीं हुई है। इस अहम मुद्दे पर शासन व निदेशालय की ओर से भी कोई ठोस कदम उठता नहीं दिखाई दे रहा।

जीएसटी (गुड्स सर्विस टैक्स) लागू होने के बाद से जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं का टोटा है। शासन से पोर्टल में डालने वाला जीएसटी लॉगिन नंबर न मिलने से पोर्टल आगे ही नहीं बढ़ रहा है। ऐसे में दवाओं की सप्लाई नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य केंद्र जाने वाले मरीजों को डाक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।
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स्थिति यह है कि जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों में इंफेक्शन की टेबलेट एंटीफंगल, गैस संबंधी दवा रेंटीडीन, आेंप्राजोल कैप्सूल, एंटी स्वास्मोडिक (पेट दर्द) व एंटी पाईरेटिक, पैरासीटामॉल (बुखार), बीकॉम्प्लेक्स, सेफ्ट्रीजिन, कैल्शियम व दर्द में लगाया जाने वाला डायक्लो भी नदारत है। इसके अलावा प्रसव के दौरान काम आने वाले दवा एलापोटान भी स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं है।

जीएसटी लॉगिन न मिलने से दिक्कतें
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो जीएसटी लागू होने के बाद से दवाओं की सप्लाई ही नहीं हो पा रही है। जब तक लॉगिन नहीं मिलेगा तब तक दवाओं का इंडेन ही नहीं हो पाएगा। विभागीय अधिकारी जल्द ही दवाओं की सप्लाई होने की बात कह रहे हैं। फिलहाल दवाएं न होने से मरीज परेशान हैं। कहीं डाक्टर बाहर की दवाएं लिख देते हैं तो कहीं नहीं भी लिख रहे हैं। ऐसे में मरीजों के इलाज में भी दिक्कतें आ रही हैं।

क्या बोले जिम्मेदार
जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस व स्टोर प्रभारी डा. एसपी चौधरी ने बताया कि इस समय दवाओं का अकाल है। जीएसटी लागू होने के बाद से दवाओं की सप्लाई ठप है। जब तक लॉगिन नंबर नहीं मिल जाता सप्लाई नहीं हो पाएगी। सीएमएस के मुताबिक जल्द ही लॉगिन नंबर मिलने की उम्मीद है।
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-बुखार, पेट दर्द, कैल्सियम, संक्रामक रोगों से बचाव की दवाएं नहीं
-जीएसटी लागू होने के बाद से दवा सप्लाई पर लगा है ब्रेक
-डायक्लोफिन व एंटी फैंगल, वीगो और मरहम की भी कमी
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