बैंकों के विलय, निजीकरण और बैंकिंग नीतियों के विरोध में दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन शहर की 80 फीसदी बैंकों में कामकाज प्रभावित रहा। सोमवार को 1900 करोड़ का लेनदेन नहीं हो सका। इसमें 390 करोड़ की क्लीयरिंग, 455 करोड़ का नकद जमा, 265 करोड़ का नकद भुगतान, 580 करोड़ का आरटीजीएस व नेफ्ट नहीं हो सका।
210 करोड़ के अन्य फंड ट्रांसफर भी अटके रहे। इसके अलावा शहर 80 फीसदी एटीएम भी खाली हो गए। जहां रुपये निकलने की सूचना मिली, लोग उसी तरफ दौड़ पड़े। कई एटीएम बूथों में लंबी लाइन देखने को मिली। मंगलवार को भी लोग इसी तरह परेशान होेंगे। संगठनों का जगह-जगह प्रदर्शन उधर, बैंक संगठनों के पदाधिकारियों और सदस्यों ने तमाम बैंक शाखाओं में ताला लगाकर क्षेत्रीय कार्यालयों के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया।
सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से किया गया था। सभी हड़ताली संगठनों ने बिरहाना रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक, पांड़ुनगर स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष सभा की।
यूनियन बैंक अधिकारी संगठन के अध्यक्ष प्रवीण मिश्र, राजीव निगम, अनिल मिश्र, शशांक त्रिपाठी, संदीप शुक्ल आदि मौजूद रहे। पंजाब नेशनल बैंक प्रोग्रेसिव इंप्लाइज एसोसिएशन के सदस्यों ने गोविंद नगर शाखा के समक्ष प्रदर्शन किया। इसमें संजय त्रिवेदी, अनिल सोनकर नीरज अवस्थी, मोहम्मद फाजिल आदि मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश बैंक वर्कर्स एसोसिएशन ने किदवई नगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने विरोध जताया। इसमें प्रबल प्रताप सिंह, प्रदीप राय, रमाकांत पांडेय ने हिस्सा लिया। उधर, बड़ा चौराहा स्थित इंडियन बैंक के बाहर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले संयुक्त रूप से कई संगठनों का प्रदर्शन हुआ। अधिकारी संघ के सचिव अंकुर मिश्रा, धर्मराज पांडेय आदि मौजूद रहे। नेशनल फेडरेशन ऑफ ग्रामीण बैंक आफिसर्स के अध्यक्ष सगुण शुक्ल की अगुवाई में काकादेव स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन हुआ।