अमर उजाला ब्यूरो
महोबा।
महिला बाल विकास एवं परिवार कल्याण व पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि साहित्य समाज की दिशा की पहचान कराता है। स्वामी विवेकानंद ने भारत देश के साहित्य को पूरे विश्व में रोशन किया है। लेकिन युवा पीढ़ी की मानसिकता बदल रही है। उसका साहित्य के प्रति रुझान घट रहा है। युवाओं को साहित्य से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि साहित्य की परंपरा को जीवित रखना चाहिए।
पर्यटन मंत्री रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज के सभागार में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित सारस्वत सम्मान समारोह में बोल रहीं थी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड साहित्यकारों की भूमि है। यहां से बड़े बड़े साहित्यकार निकले हैं। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि ने भले ही रामायण लिखी हो लेकिन जब तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखी तब राम घर-घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि साहित्य के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाने के लिए साहित्य और दर्शन को रोचक बनाना होगा। कहा कि साहित्य पढ़ने में लोगों की रुचि कम होती जा रही है।
विशिष्ट अतिथि ऋषि कुमार मिश्र ने कहा कि साहित्यकार का सम्मान वस्तुओं से नहीं है। बल्कि उसके विचारों को सुनने और अमल करने से होता है। उन्होंने कहा कि हमें जियो और जीने दो की तर्ज पर चलना चाहिए। मौजूदा समय में लोग स्वार्थी हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार स्पष्टवादी होते हैं। वह राजनेताओं के गलत कार्यों पर भी खरी-खरी सुना देते है। स्वामी विवेकानंद पुरस्कार प्राप्त श्रीधर गोविंद पराड़कर ने कहा कि भारतीय साहित्यकार की कल्पना को साकार करने की जरूरत है। साहित्यकार की रचनाएं एक बार छप गई तो उसका मालिक समाज होता है। व्हाट्स एप, फेसबुक से हमें साहित्य की थोड़ी बहुत जानकारी मिल सकती है। साहित्य के ज्ञान के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पुस्तकों का अध्ययन करना पड़ता है और उन्हें समझना पड़ता है। इस मौके पर विधायक राकेश गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर, नगर अध्यक्ष ओमनारायण तिवारी, सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य विपिन बिहारी द्विवेदी, शिवकुमार गोस्वामी, साहित्य परिषद के मंडल अध्यक्ष महेश पांडेय, जिलाध्यक्ष जगप्रसाद तिवारी, संतोष पटैरिया, रमेश जैदका, दाऊ तिवारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
सारस्वत सम्मान समारोह में प्रदेश सरकार की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा ने साहित्यकार श्रीधर गोविंद पराड़कर, ऋषि कुमार मिश्र, रवींद्र शुक्ला, कवयित्री शशि सिंह को को शाल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। समाजसेवा के कार्य में महती भूमिका निभाने वाली सरगम खरे, प्रीति शर्मा, दीपाली तिवारी और सुनीता अनुरागी को भी शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन पंडित जगप्रसाद तिवारी ने किया।
युवाओं को साहित्य से जोड़ने की जरूरत: पर्यटन मंत्री
-रुचि बढ़ाने के लिए साहित्य और दर्शन को रोचक बनाना होगा
-साहित्य परिषद के सारस्वत सम्मान समारोह का आयोजन