कानपुर देहात। जिले के सरकारी क्रय केंद्रों में किसानों से गेहूं खरीद कर 48 घंटे के अंदर भुगतान के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा पीसीएफ के केंद्रों में करीब 700 किसानों का एक करोड़ 11 लाख रुपये बकाया है। किसान भुगतान पाने के लिए खरीद केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। जबकि, केंद्र प्रभारी धन न होने की बात कह वापस कर रहे हैं। इधर, नेफैड (नेशनल कंज्यूमर मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया) के केंद्रों में गेहूं बेचने वाले किसानों का 26 लाख रुपये बकाया है।
समर्थन मूल्य योजना के तहत सरकारी क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने वाले किसानों को 48 घंटे के अंदर भुगतान करने के निर्देश शासन की ओर से हैं। बता दें कि गेहूं बिक्री के बाद मिलने वाला धन सीधे किसानों के खाते में जाएगा। केंद्रों में किसानों को कोई असुविधा न हो इसके लिए निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी पीसीएफ क्रय एजेंसी के केंद्रों में भुगतान की बड़ी समस्या आ रही है। यहां गेहूं बेचने के बाद किसान एक-एक महीना भुगतान के लिए चक्कर काटते हैं। जिले में कुल 94 केंद्रों में से 40 पीसीएफ के हैं। जिससे बड़ी संख्या में इन केंद्रों पर किसानों ने गेहूं की बिक्री की लेकिन अब भुगतान के लिए परेशान हो रहे हैं। समय से भुगतान न होने के कारण किसानों क्रय केंद्र पर गेहूं ले जाना पसंद नहीं कर रहा है।
पीसीएफ केंद्र में गेहूं बेचने वाले करीब 700 किसानों का एक करोड़ 11 लाख 70 हजार रुपये बकाया है। इसके अलावा नैफेड के केंद्रों में गेहूं बेचने वाले करीब 50 किसानों का 12 लाख 53 हजार रुपये बकाया है। सबसे कम खाद्य विभाग को केवल 1 लाख 86 हजार रुपये किसानों को भुगतान करना है। भुगतान के लिए किसान केंद्रों का चक्कर काट रहे हैं। जिले में कुल 9 क्रय एजेंसियों ने खरीद की है, जिसमें भुगतान के मामले में सबसे ज्यादा खराब स्थिति पीसीएफ की है।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी ने शिशिर कुमार ने बताया कि पीसीएफ के केंद्रों में भुगतान की समस्या आ रही है। जिला प्रभारी को दो दिन के अंदर भुगतान करने के निर्देेश दिए गए हैं। इसके बाद भी यदि भुगतान नहीं हो रहा है तो मामले में उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा ।
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