अमर उजाला ब्यूरो
झींझक। कस्बे की सीएचसी में खोली गई मेटरनिटी विंग को छह महीने बाद भी महिला डॉक्टर नहीं मिल पाई है। प्रसव स्टाफ नर्स के भरोसे कराया जा रहा है। अस्पताल में पीने के पानी और बिजली तक की समस्या है। बिजली जाने पर मरीजों व तीमारदारों को मोमबत्ती व मोबाइल की रोशनी में रात गुजारनी पड़ती है।
झींझक सीएचसी में सितंबर 2018 में मेटरनिटी विंग का शुभारं हुआ था। 3 करोड़ में बनी इस विंग में मार्च तक 615 प्रसव कराए जा चुके हैं। इसमें 50 गर्भवती/प्रसूताओं को रेफर करना पड़ा। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से कई शिशुओ की मौत भी हो गई। अस्पताल में अभी तक सीएचसी में लगा जनरेटर बिजली जाने पर चलाया नहीं जाता है। इससे बिजली जाने पर मरीज व तीमारदार मोमबत्ती या मोबाइल फोन की लाइन जलाकर रात गुजारते हैं। पानी की टंकी की मोटर भी दो महीने से फुंकी पड़ी है। इससे पीने के पानी की भी समस्या है।
परिसर की साफ सफाई भी ठीक से नहीं की जाती है। कंचौसी के अखिलेश और नसीरपुर के पिंकू यादव ने बताया कि महिला डॉक्टर न होने से दिक्कत होती है। झींझक के मोनू दीक्षित ने बताया कि लिफ्ट भी खराब पड़ी है। मुंडेरा के कपिल ने कहा कि मेटरनिटी विंग खुलने से क्षेत्र की गर्भवतियों को सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ी थी लेकिन डॉक्टर की तैनाती न होने से विंग का खास फायदा नहीं मिल पा रहा है।
सीएचसी अधीक्षक डा. विमलेश वर्मा ने बताया कि मेटरनिटी विंग के मरीजों को सीएचसी में तैनात डॉ पूजा अवस्थी देखती हैं। विंग में डॉक्टर की तैनाती के लिए पत्र लिखा जा चुका है। अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए भी सीएमओ को लिखा जा चुका है। जल्द ही समस्याएं दूर करा दी जाएंगी।
अस्पताल की लिफ्ट खराब, पानी का भी संकट
झींझक मेटननिटी विंग में महिला डॉक्टर की तैनाती थी नहीं
टो संख्या 11एकेबीपी05- झींझक का मेटरनिटी विंग
फोटो संख्या 11एकेबीपी06- मेटरनिटी विंग की खराब पड़ी लिफ्ट
फोटो संख्या 11एकेबीपी07- अखिलेश
फोटो संख्या 11एकेबीपी08- कपिल
फोटो संख्या 11एकेबीपी09- पिंकू यादव
फोटो संख्या 11एकेबीपी10- मोनू दीक्षित