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झींझक स्टेशन पर न छाया, न पानी

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अमर उजाला ब्यूरो
झींझक। रेलवे को करीब दो करोड़ रुपये सालाना की आमदनी कराने वाले झींझक रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है। यहां न यात्रियों के लिए प्लेटफार्म पर छाया है और न ही पीने के लिए पर्याप्त पानी। कैंटीन समेत अन्य सुविधाएं न होने से यात्रियों को भटकना पड़ता है।


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के गृहक्षेत्र के इस स्टेशन पर 12 ट्रेनों का ठहराव है। यहां से प्रतिनिधि हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं। अप व डाउन प्लेटफार्म पर बना एक-एक टिन शेड ही बना है। शीड के नीचे जगह कम होने से यात्रियों को पेड़ों के नीचे बैठकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। डाउन के प्लेटफार्म पर पेयजल के लिए बना एकमात्र स्टैंड पोस्ट अक्सर खराब रहता है। डाउन लाइन के प्लेटफार्म का स्टैंड पोस्ट खराब है। डाउन लाइन पर माल गोदाम के सामने बने शौचालय को बाहरी लोग उपयोग करते हैं। कस्बे के मान सिंह राजपूत ने कहा कि स्टेशन के नीचे खाली पड़ी जमीन पर पार्क बनाया जाए, ताकि यात्री पेड़ों की छाया में ट्रेन का इंतजार कर सकें।
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देवेंद्र पाठक कहा कि रेलवे स्टेशन पर वाहन पार्किंग के लिए भी सुविधा नहीं है। झींझक के सुबोध ओमर ने कहा कि खानपान के लिए कैंटीन और महिलाओं के लिए अलग प्रतीक्षालय बनाया जाए, सुरक्षा के लिए जीआरपी में महिला कांस्टेबल व दरोगा की तैनाती होनी चाहिए। झींझक के विनय सिंह ने कहा कि स्टेशन को बी श्रेणी में शामिल कर वातानुकूलित प्रतीक्षालय, आटोमेटिक एनाउंसमेंट की सुविधा होनी चाहिए।
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स्टेशन अधीक्षक झींझक वेद प्रकाश ने बताया की 60 लाख से 5 करोड़ तक आय वाले स्टेशन को डी ग्रेड में रखा जाता है। ऐसे स्टेशनों पर आरक्षण कराने वाले यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय, पेयजल, छाया, कैंटीन, प्रकाश आदि के समुचित प्रबंध होता है। स्टेशन की स्थिति के बारे में अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है।





झींझक स्टेशन पर न छाया, न पानी
प्रतिनिधि एक हजार लोग करते हैं स्टेशन से यात्रा
टिकट से करीब दो करोड़ होती है रेलवे को आय
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