अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। किसानों और राहगीरों के लिए मुसीबत बने 1762 छुट्टा मवेशियों को गोवंश आश्रय स्थल पहुंचाया जा चुका है इसके बावजूद समस्या कम नहीं हो रही है। सड़कों और खेतों में घूम रहे मवेशियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसके चलते प्रशासन जिले के छुट्टा और पालतू मवेशियों की टैगिंग कराने का फैसला लिया है।
आश्रय स्थल में बंद की गणना कर उनके दोनों कानों में टैग लगाए जा रहे हैं। टैग लगने के बाद पशु किस आश्रय स्थल में बंद है ये आंकड़ा पशु पालन विभाग में दर्ज कराया जाएगा। आश्रय स्थल में बंद छुट्टा मवेशियों के बाद पालतू मवेशियों की टैगिंग का भी कराई जाएगी। पालतू पशुओं की गणना में पशु पालक का नाम, उसके पास कितने और किस प्रजाति (गाय, भैंस, बकरी आदि )के पशु हैं इसका ब्योरा जुटाया जाएगा।
विभाग का मानना है कि किसान पशुओं की उपयोगिता खत्म होने के बाद उन्हें छुट्टा छोड़ रहे हैं। यही मवेशी आमजन के साथ किसानों को लिए भी समस्या बने हैं। पशुओं की टैगिंग होने के बाद उन्हें छुट्टा छोड़ना संभव नहीं होगा। अगर किसान अपने मवेशी को छुट्टा छोड़ता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डीसी अग्रवाल ने बताया कि आश्रय स्थल में बंद मवेशियों की टैगिंग की जा रही है। इसके पालतू मवेशियों की भी टैगिंग की जाएगी।
जिले भर के पशुओं को लगेंगे टैग
आश्रय स्थ्लों में बंद 1762 मवेशियों से शुरू हुआ टैगिंग का काम
क्रासर
गांव गांव में पालतू मवेशियों की भी की जाएगी पहचान
फोटो संख्या 17एकेबीपी24- किसानों की फसलों को रौंदते छुट्टा मवेशी