अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। रसूलाबाद ब्लाक के अजनपुर इंदौती में शौचालय निर्माण करीब 24.93 लाख रुपये घोटाले की रकम जिलाधिकारी पूर्व प्रधान और तत्कालीन पंचायत सचिव से वसूल नहीं कर पा रहे हैं। साढ़े तीन साल में मुकदमा, पंचायत सचिव का निलंबन और बहाली भी हो गई लेकिन सरकारी पैसा प्रशासन उनके पास से नहीं निकलवा पाया है। वसूली का अंतिम आदेश जारी हुए भी एक महीना बीत चुका है लेकिन एक रुपया भी वसूल नहीं हुआ।
अजनपुर इंदौती ग्राम पंचायत को वर्ष 2012-13 में लोहिया ग्राम घोषित किया गया था। उस समय सौरभ सिंह गांव के प्रधान और विष्णु गुप्ता पंचायत सचिव थे। गांव में 758 शौचालय बनाने के लिए शासन ने 3486800 रुपये जारी किए गए थे। इसमें 431 शौचालय बनाए गए थे। वर्ष 2015 जंटर सिंह गांव के नए प्रधान बने। इसके बाद उन्होंने शौचालय निर्माण में घोटाले का आरोप लगाकर डीएम से शिकायत की थी। करीब दो साल में पांच कमेटियों से जांच कराई गई। सभी कमेटियों की जांच में शिकायत सही पाई गई और 2493175 रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई।
इस घोटाले में 731250 रुपये मनरेगा का पैसा भी शामिल है। तत्कालीन डीएम कुमार रविकांत सिंह सितंबर 2017 में तत्कालीन प्रधान सौरभ सिंह और तत्कालीन पंचायत सचिव विष्णु गुप्ता से घोटाले की रकम वसूलने के आदेश तत्कालीन डीपीआरओ को दिए थे। पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव वे 50-50 प्रतिशत वसूली होनी है। डीएम के आदेश पर 8 फरवरी 2018 का तत्कालीन प्रधान व सचिव के खिलाफ सरकारी धन गबन का मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया। 15 मार्च 2018 को निलंबित हुए सचिव विष्णु गुप्ता 27 अप्रैल को बहाल मामले का निस्तारण किए बिना बहाल भी कर दिया गया। शिकायतकर्ता के याद दिलाने पर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने 5 जनवरी फिर पूर्व प्रधान व तत्कालीन सचिव से घोटाले की रकम की वसूली का आदेश जारी किया था लेकिन एक महीने बाद एक भी रुपया वसूल नहीं हो पाया है।
पंचायती राज विभाग में 50 से अधिक गांवों में निर्माण कार्य में गड़बड़ी की शिकायतों की फाइलें दबी हैं। सरवनखेड़ा ब्लाक के भरतपुर पियासी, रसूलाबाद के बैरीसाल, जोत सुजावरपुर आदि ग्राम पंचायत के लोगों की शिकायत पर जांच हुई। इसमें गड़बड़ी मिली कार्रवाई आगे बढ़ाने के बजाए फाइलें दबा दी गईं। जोत व सुजावरपुर में गड़बड़ी की जांच डीएम ने एसडीएम अकबरपुर से कराई थी जिसमें गड़बड़ी पाई गई थी। जोत गांव की प्रधान रमा देवी उनके बेटे सुधीर पांडेय, सुजारवरपुर की प्रधान रिंकी समेत सात लोगों पर तत्कालीन तहसीलदार राजीव उपाध्याय ने भ्रष्टाचार व धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया था। ये मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। डीएम राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर शुक्रवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राजीव उपाध्याय ने डीपीआरओ दफ्तर में फाइलें खंगाली थीं। उसमें पटल सहायक की लापरवाही मिली थी लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई।
घोटाले की रकम नहीं वसूल पा रहा प्रशासन
अजनपुर इंदौती गांव में शौचालय निर्माण में हुआ था 24.93 लाख का घोटाला
क्रासर
वर्ष 2015 से 17 तक पांच कमेटियों की जांच
पूर्व प्रधान, सचिव पर दर्ज कराया था मुकदमा
दो बार रिकवरी के आदेश भी दे चुके हैं डीएम