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36 घंटे बाद भी नहीं बुझी आग

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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। ग्रोथ सेंटर जैनपुर स्थित आनंदेश्वर पेपर मिल में सोमवार सुबह करीब 11:15 बजे लगी आग 36 घंटे बाद भी नहीं बुझाई जा सकी थी। सात दमकल के साथ 50 कर्मी आग पर बुझाने में मंगलवार देर शाम तक जुटे थे लेकिन फैक्टरी में लगे रद्दी के ढेर सुलग रहे थे। वर्किंग प्लांट को जरूर बचा लिया गया।

पेपर मिल के विद्युत प्लांट में शार्ट सर्किट होने परिसर में जमा अखबार, गत्ता आदि रद्दी (कच्चे माल) में आग लग गई थी। फैक्टरी प्रबंधन की सूचना एफएसओ पुष्पेंद्र सिंह खुद माती से दो, भोगनीपुर, सिकंदरा के एक-एक दमकल लेकर फैक्टरी पहुंचे। आग पर काबू न होने पर कानपुर नगर से तीन और दमकल बुलानी पड़ी थीं। दमकल कर्मियों ने प्लांट की ओर आग नहीं बढ़ने दी लेकिन कई बीघा में जमा कच्चे माल में आग बढ़ती ही गई। एफएसओ ने बताया कि आग अभी पूरी तरह से बुझ नहीं पाई है। रद्दी से अभी भी धुआं निकल रहा है। दमकलकर्मी गाड़ियों के साथ आग बुझाने में जुटे हैं। पूरी तरह से आग बुझाने के बाद ही हटेंगे। दमकल कर्मियों के साथ फैक्टरी के करीब 100 मजदूर भी आग बुझने में लगे हैं। निदेशक बंसल ने बताया क्रि आग से फैक्टरी में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है लेकिन अभी पूरा ध्यान आग बुझाने पर है इसके बाद कच्चे माल का स्टाक रजिस्टर आदि देखे जाएंगे तब पता चल सकेगा कि कितना नुकसान हुआ है।
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पेपर मिल लगी आग के बाद वहां जमा कच्चे माल जल गया है। मलबा हटाकर फैक्टरी के दूसरे हिस्से में डालने के लिए आठ जेसीबी व 12 ट्रैक्टर लगाए गए हैं। फैक्टरी प्रबंधन मलबा को वर्किंग प्लांट से हटाकर वहां साफ सफाई कराने के बाद नया कच्चा माल मंगाएगा तब फैक्टरी चालू हो सकेगी। इसमें करीब 15 दिन लग सकते हैं। एफएसओ का कहना था कि पूरी तरह से आग बुझाने के लिए माल हटवाना जरूरी है अगर एक भी चिंगारी दबी रह गई तो फिर आग भड़क सकती है।


पेपर मिल में कच्चा माल गत्ता आदि लेकर आए ट्रक चालक गाड़ी खाली होने का इंतजार करते रह रहे हैं। कच्चा माल लदे ट्रक औद्योगिक क्षेत्र के सर्विस मार्गों पर खड़े हैं। माल बिहार, झारंखंड आदि प्रांतों से आया है। फैक्टरी के बाहर खड़े अजीतमल औरैया निवासी ट्रक चालक मुलायम सिंह ने बताया कि कल शाम को बिहार से माल लेकर आ गए थे। झारखंड से गत्ता लादकर आए चालक सुनील ने बताया कि सुबह भोर पहर गाड़ी लेकर आया था। आते ही कांटा होकर गाड़ी खाली हो जाती थी लेकिन अब इंतजार करना पड़ेगा। मोहनियापुर बिहार से कच्चा माल लेकर आए अरविंद ने बताया कि सोमवार दोपहर आ गए थे। ट्रक मिल के अंदर था तभी आग लग गई, इससे ट्रक लेकर बाहर भगना पड़ा। ट्रक मालिक रास्ते का खर्च देते हैं, यहां रुककर खाने का खर्च जेब से उठाना पड़ेगा। रांची झारखंड से आए सिराज ने भी यही बात कही।


मिल में लगभग डेढ़ सौ श्रमिक काम करते हैं। इनमें ज्यादातर बिहार के हैं, सभी फैक्टरी के अंदर बने कमरों में ही रहते हैं। आग लगने के बाद दमकल कर्मियों के साथ श्रमिक गृहस्थी बचाने में जुटे रहे। काम शुरू होने में करीब 15 दिन लगेगा, इससे श्रमिकों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। श्रमिक शिवराज, महेश, चंद्रकांत, शिवदेवी ने कहा कि फैक्टरी बंद हो गई तो रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा।
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पेपर मिल में आग लगने के बाद दमकल कर्मियों को पास में पानी नहीं मिल रहा था तभी सीएफओ ने जैनपुर स्थित सिहांसनी कृषि यंत्र के मालिक संजय श्रीवास्तव से संपर्क किया। उनके यहां डेढ़ लाख लीटर पानी का स्टाक था। जिसे दमकल वाहनों में भरकर लाया गया, जिससे आग काबू करने में मदद मिली। एक पाली पैक व नलकूप से भी दमकल वाहनों ने पानी लिया। फैक्टरी प्रबंधन भी पंप चलवाकर अपने कर्मियों आग पर पानी डलवाता रहा।



36 घंटे बाद भी नहीं बुझी आग
रात भर उठतीं रहीं कई बीघे में जमा रद्दी से लपटें
क्रासर
दमकल कर्मियों ने फैक्टरी का वर्किंग प्लांट सुरक्षित किया
फोटो संख्या-22 एकेबीपी-1 फैक्टरी परिसर में जमा आग से जला मलबा
फोटो संख्या-22 एकेबीपी-2 मलबा हटाते कर्मचारी
फोटो संख्या-22 एकेबीपी-3 दमकल कर्मी से बात करते फैक्टरी के निदेेशक
फोटो संख्या-22 एकेबीपी-4 नलकूप से पानी दमकल वाहन
फोटो संख्या-22 एकेबीपी-5 आग की चपेट आया आनंदेश्वर पेपर मिल



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