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बिन बरसे बीता आषाढ़ का पहला हफ्ता

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पुखरायां (कानपुर देहात)। बरसात के मौसम का प्रमुख महीना आषाढ़ बिन बरसे एक सप्ताह निकल गया, अब सूखे के जैसे हालात बन गए हैं। गत वर्ष इसी महीने सेंगुर नदी बाढ़ आ गई थी। नाव के सहारे लोग गांव पहुंच पाते थे। वहीं, इस वर्ष सेंगुर नदी पहली बार सूखी पड़ी है। नदी को ग्रामीण रास्ते के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, किसान उर्द, तिली की फसल भी नहीं बो पा रहे हैं।
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भोगनीपुर तहसील क्षेत्र इस वर्ष सूखे की चपेट जाता दिख रहा है। छुटपुट बारिश के अलावा अब तक ऐसी बरसात नहीं हुई कि खेतों की मिट्टी गीली हो सके। रघुवंशी सिंह सचान, छोटे सिंह यादव, संजय दीक्षित, राजेंद्र सिंह, शिवविलास, अबरार, मनोज कुमार, साकेत यादव, मोहम्मद शमी, शत्रुघ्न सिंह यादव, बाबूराम यादव, बटे कृष्ण मिश्र, उपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि जून में पहले एक तेज बारिश हो जाया करती थी, जिससे खेतों को तैयार कर लिया जाता था। इसके बाद अषाढ़ की पहली बरसात में ही मौका मिलने पर बुआई चालू कर दी जाती थी।
इसके लिए कहावत कही गई है ‘तेरा कातिक तीन अषाढ़’ जो आज चरितार्थ होती नहीं दिख रही। बताया कि जून के महीने में भी बारिश नहीं हुई। अब अषाढ़ के महीने का एक सप्ताह बीत गया बरसात पानी नहीं हुआ। जिससे खेतों में डीले दिखाई दे रहे हैं। जबकि, अषाढ़ के महीने को बरसात का प्रमुख महीना माना जाता है। बरसात के लिए विभिन्न प्रकार के टोटके भी किए जा रहे हैं।
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बताया कि क्षेत्र की प्रमुख सेंगुर कभी नहीं सूखती थी, इस वर्ष पहली बार ऐसा हुआ कि जनवरी में ही सूखने लगी थी। वहीं मूसानगर के पास हलिया घाट पर जहां यमुना नदी में सेंगुर नदी मिलती है, वहां से यमुना नदी काफी दूर निकल गई थी। यमुना नदी का जल स्तर अभी तक नहीं बढ़ा है। इस महीने में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से संगुर नदी चपरघटा, आढ़न, पथार, मुसरिया, भुंडा, भरतौली, रसूलपुर, नगीना बांगर, कट्टा पुर्वा, लवरसी, सिहारी, बम्हरौली घाट, मउदन सहित कई गांवों का रास्ता अवरुद्ध हो जाता था।
वहीं, आसपास सिकंदरा तहसील क्षेत्र के राजपुर तक बरसात हो रही है। भोगनीपुर तहसील क्षेत्र में गर्द उड़ रही है। इससे जायद की फसल मकाई, भदइली मूंग, उर्द, सामा, तिली की बुआई नहीं हो पा रही है। बाबूराम यादव ने बताया कि जब धान की बेल नहीं बो पाएगी तो रोपाई कहां से होगी।
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