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50 रुपये के समझौते पत्र से सौंप दी 14 करोड़ की जमीन, दोहरी स्टांप चोरी का फूटा भांडा

Sat, 05 Jan 2019 06:02 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो - फोटो : डेमो
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उप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी, अब यूपीसीडा) के अधिकारियों और अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड ने मिलीभगत तक दोहरी स्टांप चोरी को अंजाम दिया। यूपीएसआईडीसी के तत्कालीन अधिकारियों ने गाजियाबाद स्थित ट्रोनिका सिटी की करीब 14 करोड़ रुपये कीमत वाली 87.10 एकड़ जमीन महज 50 रुपये के समझौता पत्र (एमओयू) पर अंसल ग्रुप को दे दी। अंसल ग्रुप ने यूपीएसआईडीसी से जमीन की रजिस्ट्री न कराकर पहली और फिर बेचे गए प्लाटों की यूपीएसआईडीसी की दरों पर रजिस्ट्री कराकर दोहरी स्टांप चोरी को अंजाम दिया। इस मामले में बृहस्पतिवार को कल्याणपुर थाने में यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों समेत नौ लोगों के खिलाफ सीबीसीआईडी ने एफआईआर दर्ज कराई है।

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1997 में अंसल ग्रुप ने यूपीएसआईडीसी से बल्क सेल के जरिए 87.10 एकड़ अविकसित जमीन का आवंटन कराया। अविकसित जमीन बल्क सेल में लेने के कारण यूपीएसआईडीसी की तत्कालीन दरों 1100 रुपये प्रति वर्गगज के सापेक्ष अंसल ग्रुप को 397 रुपये प्रति गज की दर पर जमीन दी गई। अंसल ने इस जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई। अंसल ने इस जमीन को 2200 रुपये प्रति वर्गगज की दर से विकसित कर बेचा। प्लाट खरीदने वालों को यूपीएसआईडीसी अधिकारियों ने प्रथम आवंटी बताते हुए यूपीएसआईडीसी की दरों पर रजिस्ट्री कराई, जबकि यह रजिस्ट्री तत्कालीन सर्किल रेट के आधार पर होनी चाहिए थीं। यूपीएसआईडीसी की दरें 1100 रुपये प्रति वर्गगज थीं, जबकि ट्रोनिका सिटी का तत्कालीन सर्किल रेट करीब 11 हजार रुपये प्रति वर्गगज का था। इस तरह एक बार फिर निबंधन विभाग को आर्थिक चोट पहुंचाई गई। अधिकारियों ने अनुबंध करने में भी हड़बड़ी दिखाई। 13.96 एकड़ ग्राम समाज की जमीन मिले बिना ही अनुबंध कर लिया गया।

4.50 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी
इस मामले में सहायक आयुक्त स्टांप की कोर्ट ने 16 जनवरी 2015 को आदेश जारी कर करीब तीन करोड़ रुपये की स्टांप चोरी और 1.50 करोड़ रुपये यानी कुल करीब 4.50 करोड़ रुपये का अर्थदंड अंसल ग्रुप पर लगाया था। इससे पूर्व 21 सिंतबर 2004 को एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ने भी 2 करोड़, 82 लाख 52 हजार 235 रुपये की स्टांप कमी का नोटिस जारी किया था। स्टांप शुल्क की अदायगी से बचने के लिए अंसल ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। आरोप है कि इससे पूर्व अंसल को शुल्क न देने के लिए काफी मौका दिया गया।
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फाइलें कर दीं गायब
जमीन आवंटन के बाद अधिकारियों ने इससे जुड़ी फाइलें गायब कर दीं। आरोपित अधिकारी भी जांच में असहयोग करते रहे। हाईकोर्ट के आदेश पर कल्याणपुर थाने में दर्ज रिपोर्ट में आरोपियों पर साजिश के तहत गबन, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल करने की धाराएं लगाई गई हैं।

इन पर हुई है एफआईआर
अंसल ग्रुप के मालिक यूजीएफ इंद्रप्रस्थ बाराखंभा रोड, नई दिल्ली निवासी दीपक अंसल समेत कल्याणपुर निवासी यूपीसीडा के पूर्व महाप्रबंधक यशपाल सिंह, पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक प्रदीप कुमार, पूर्व सहायक प्रबंधक अनूप कुमार श्रीवास्तव के अलावा लखनऊ के गोमतीनगर निवासी आईएएस रामबोध मौर्या, राजौरी गार्डन दिल्ली निवासी सुभाष चंद्र वाधवा, राजनगर गाजियाबाद निवासी संतोष कुमार, ट्विन टॉवर निकट गुरुदेव कल्याणपुर, कानपुर निवासी राजेश कुमार चौहान (यूपीसीडा सहायक अभियंता) और स्टाफ कॉलोनी ट्रोनिका सिटी गाजियाबाद निवासी शब्बीर अहमद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।

ऐसे मामलों की जांच शुरू
ट्रोनिका सिटी के बाद अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी स्टांप चोरी संबंधी मामलों की जांच शुरू करा दी गई है। अधिकारियों की मिलीभगत से कई क्षेत्रों में इस तरह के मामलों की शिकायतें दर्ज हुई हैं।
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