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जीएसटी : आवश्यक दवाइयों व नए कपड़ों में कमी

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उन्नाव। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक ओर जहां देश को एक राष्ट्र, एक कर में शामिल कर रहा है। व्यापारियों को कई करों से मुक्ति दिलाकर सिर्फ एक ही टैक्स देने की सुविधा लेकर आया है। वहीं इसकी दहशत ने लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने वाली चीजों से दूर कर दिया है।
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जीएसटी के प्रभावी होने के बाद जहां कई दवा कंपनियाें ने दवाओं की सप्लाई बंद कर रखी है वहीं कपड़ा व्यवसायी भी विरोध को देखते हुए खरीदारी से बच रहे हैं। इससे मरीजों को जहां आवश्यक दवाइयों के लिए भटकना पड़ रहा है, वहीं नए कलेवर व डिजाइन के कपड़े भी नहीं मिल रहे हैं।

शनिवार से देश भर में जीएसटी को प्रभावी कर दिया गया है। केंद्र व प्रदेश सरकारें जीएसटी से होने वाले फायदों व सुविधाओं की गिनती करते थक नहीं रहे हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों के दिमाग में जीएसटी से लिखा पढ़ी बढ़ने व माल के परिवहन के समय होेने वाली परेशानियाें की आशंका बैठ गई है।
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इस दहशत में कई व्यापारियों ने खरीदारी रोक दी है। इससे लोगों को आउट आफ फैशन हो चुकी डिजाइनों के कपड़ों से ही काम चलाना पड़ रहा है। शहर के रेडीमेड कपड़ा व्यापारी बताते हैं उन लोगों ने जीएसटी के लागू होने के बाद इसमें बढ़े टैक्स के कारण कपड़े की खरीदारी नहीं की है।

कपड़े का काम करने वाले अभी तक बिना टैक्स के ही व्यापार करते थे। अब इस पर पांच प्रतिशत का टैक्स लगने के बाद उन्हें पूरी लिखा पढ़ी भी करनी होगी। व्यापारी इससे बेहद परेशान हैं। वहीं कई कंपनियों के सप्लाई रोक देने से मेडिकल स्टोर संचालकों को जरूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ी है।

कंपनियां नहीं कर रही दवा की सप्लाई: शहर की दवा मार्केट में स्थित एवन मेडिकल स्टोर के संचालक तरुन चौधरी ने बताया कि जीएसटी लागू होने के करीब एक सप्ताह पहले से ही कई दवा कंपनियों ने सप्लाई रोक दी थी। जो स्टाक उपलब्ध था उसे ग्राहकों को दिया गया। लेकिन अब अधिकतर दवाइयां खत्म हो गई हैं। आगे कंपनियां कब से सप्लाई देंगी इसकी जानकारी नहीं है। अब तो ग्राहक बिना दवा लिए ही वापस जा रहे हैं। -तरून चौधरी, दवा व्यवसायी

बिक रहा कपड़े का पुराना स्टाक: शहर के स्टेशन रोड पर रेडीमेड कपड़े के व्यवसायी अमित सोनी ने बताया कि जीएसटी की आहट मिलने के बाद से ही माल की खरीदारी रोक दी गई थी। करीब एक माह से खरीदारी नहीं हो रही है। जीएसटी में टैक्स की बढ़ोत्तरी होने की पूरी जानकारी नहीं हो पाई है। इससे थोक दुकानदार भी मनमाने रेट ले रहे हैं। इससे खरीदारी नहीं की जा रही है। पुराना माल ही बेचा जा रहा है।- अमित सोनी, कपड़ा व्यवसायी
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-कई कंपनियों के दवा की सप्लाई न होने से बीमारों की बढ़ी परेशानी
-कपड़ा व्यापारियों के खरीदारी न करने से नहीं आए नए कलेवर के कपड़े
अमर उजाला ब्यूरो
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