लॉकडाउन के कारण किताब रूपी ‘जिंदगी’ का पन्ना ऐसा पलटेगा यह कोई जानता था। 13 साल के बालक को परिवार की भूख मिटाने के लिए सब्जी का ठेला खींचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यह सच्चाई है हमीरपुर के कांशीराम कॉलोनी निवासी शनि की।
उसके पिता दिल्ली की एक धागा फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। बड़ा भाई (20) भी दिल्ली में ही मजदूरी करता है। मां परिषदीय स्कूल में रसोइया हैं, जिनका हाल ही में आंख का ऑपरेशन हुआ है। पिता और भाई मजदूरी करके जो कमाते हैं उससे मां का इलाज और परिवार का पेट पलता है।