घाटमपुर। यमुनापट्टी में बन रहे 1980 मेगावाट पावर प्लांट के निर्माण कार्य पर लगे एक मजदूर की बीमारी से कानपुर के हैलट अस्पताल में मौत हो गई। मजदूर की मौत की सूचना आते ही साथी भड़क गए। साथी मजदूर शव को गायब करने का आरोप लगाकर पावर प्लांट लाए जाने की मांग की। मांग पूरी न होने पर कंपनी के आफिस में पथराव और तोड़फोड़ की। कंपनी के कई वाहनों के शीशे तोड़ डाले। मजदूरों के उग्र रूप को देखकर मौके पर कई थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ पड़ोसी जिला हमीरपुर से पुलिस बल बुलाया गया। बवाल और तोड़फोड़ की सूचना पर एसपी ग्रामीण प्रदुम्न सिंह और सीओ व एसडीएम मौके पर पहुंचे। वहीं, दोपहर में डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी अखिलेश कुमार भी पहुंच गए। मजदूरों को शांत करने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस को लाठीचार्ज भी कर पड़ी। जबकि, चर्चा है कि हवाई फायरिंग भी की गई। लेकिन, पुलिस ने इससे इंकार किया।
नेयवेली पावर प्लांट में बीजीआर एनर्जी सिस्टम कंपनी चिमनी और कूलिंग टॉवर सहित कई अन्य निर्माण करवा रही है। कंपनी में अधिकांश मजदूर बिहार प्रांत से हैं। इन मजदूरों बृजेश, मुकेश, अनंत झा, रामस्वरूप मंडल, अजीत और मनटुन आदि ने बताया कि पन्नालाल नामक ठेकेदार के माध्यम से वह नेयवेली प्लांट में काम करने आए हैं। उन्होंने बताया कि साथी मजदूर प्रमोद मंडल (40) पुत्र दामोदर मंडल निवासी विशनपुर, डहरा, जिला कटिहार, गुरू बाजार (बिहार) बीते तीन दिनों से बुखार से पीड़ित था। बताया कि बीमार होने के बावजूद कंपनी के अधिकारी व कर्मचारी उससे काम करवा रहे थे। बीते गुरुवार की सुबह उसकी हालत बिगड़ने पर कंपनी के कर्मचारी एक वाहन में लादकर ले गए। इसके बाद शुक्रवार की सुबह पता चला कि उसकी मौत हो गई। जब साथी मजदूरों ने लाश दिखाने की बात कही तो कंपनी कर्मचारी टाल गए। इसी बात पर मजदूर भड़क गए और काम बंद कर तोड़फोड़ और पथराव शुरू कर दिया। उन्होंने बीजीआर कंपनी के आफिस का मुख्य गेट तोड़कर और पांच-छह गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर आग लगाने की कोशिश की। मजदूरों की मांग थी कि जबतक शव नहीं आएगा वह कोई काम नहीं करेंगे।
इधर, मजदूरों के हंगामे में लहुरीमऊ गांव के ग्रामीण भी शामिल हो गए। पुलिस बल पहुंचा तो सड़क से ही जो मिला उसको लठियाना शुरू कर दिया। वहीं, गांव में चल रहे भंडारे में आए कई ग्रामीण भी इसी चपेट में आ गए। लहुरीमऊ निवासी किशोर अजीत का सिर फट गया। जबकि, कंपनी के टेक्नीशियन जितेंद्र नाथ दुबे और एसओ सजेती रविशंकर तिवारी पथराव की चपेट में आने से घायल हुए। ग्रामीणों और मजदूरों का पलड़ा भारी देख एसपी ग्रामीण ने और पुलिस बल बुलवाया। इधर, डीएम कानपुर नगर और एसएसपी भी पहुंचे। तबतक बवाल शांत हो चुका था। उन्होंने मजदूरों की अस्थाई कालोनी में जाकर उनका हाल-चाल लिया और मृतक मजदूर के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने का भी भरोसा दिया। मजदूरों से अलग-अलग बातचीत करके घटना के पीछे कारण भी जाने। वहीं, सीओ और सजेती एसओ को घटना में शामिल अराजकतत्वों की धरपकड़ करने के भी निर्देश जारी किए।
अस्पताल में भर्ती कराया गया था मजदूर
नेयवेली पावर प्लांट में निर्माण करवा रही सहयोगी कंपनी बीजीआर के मैनेजर रवींद्र सिंह ने बताया कि मजदूर प्रमोद मंडल को इलाज के लिए जिला अस्पताल, हमीरपुर में भर्ती कराया गया था। वहां से उसको हैलट (कानपुर) रेफर किया गया। कानपुर में पहुंचने पर डाक्टरों ने उसको भर्ती नहीं किया। कानपुर के वैष्णवी अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बताया कि मजदूर प्रमोद मंडल को बुखार और पेटदर्द की शिकायत शुरू हुई थी। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई।
घाटमपुर। अधिकारियों के निर्देश पर सजेती पुलिस ने बवाल करने के आरोपियों को कैमरों की फुटेज से पहचानने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी करनी शुरू कर दी है। शाम 4 बजे तक अजीत निवासी लहुरीमऊ (सजेती), पिंटू निवासी सीमनपुर, फंफूद (औरैया), मनटुन निवासी दमदमा निमिया, बेगूसराय (बिहार), धर्मराज निवासी बन्नीपुरवा, खन्ना (महोबा), शिवनाथ निवासी सिधौल (सजेती) और पडरौना (कुशीनगर) निवासी धर्मेंद्र दीक्षित सहित छह लोगों को थाने पहुंचाया गया था। जबकि, देर शाम तक धर-पकड़ जारी है।
इधर, पकड़कर थाने में बैठाए गए लोगों ने खुद को निर्दोष बताया। धर्मेंद्र दीक्षित ने बताया कि वह पावर प्लांट कार्यालय के बाहर पानी-पूरी की दुकान लगाता है। शिवानाथ ने बताया कि वह भंडारे में प्रसाद लेने गया था। जबकि, धर्मराज ने बताया कि वह रास्ते से निकलकर जा रहा था। पुलिस ने उसको पथराव करने के आरोप में पकड़ लिया।