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मानक दरकिनार, छोड़ दिए 75655 परिवार1

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फर्रुखाबाद। जरूरतमंदों को सस्ते दर अनाज मुहैया कराने की मंशा से शुरू की गई खाद्य सुरक्षा योजना को विभागीय अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। नए राशन कार्ड बनाने में खाद्य आपूर्ति विभाग में मानकों का जमकर उल्लंघन किया गया। फर्रुखाबाद सदर में जहां मानक से ज्यादा लोगों के राशनकार्ड बना दिए गए, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों और पांच अन्य निकायों में बड़ी संख्या मेें पात्र परिवारों को छोड़ दिया गया। आंकड़े गवाह हैं कि बढ़ी आबादी के अनुपात में 75655 पात्र ग्रामीण परिवारों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभ से वंचित कर दिया गया है। जरूरतमंद आए दिन तहसील और कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन करते हैं, इसके बावजूद अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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सात ब्लाकों में 612 ग्राम पंचायतें हैं। 2011 की जनगणना में गांवों की आबादी करीब 1500734 थी। दो प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के हिसाब से अक्तूबर 2017 तक ग्रामीण आबादी लगभग 1680000 पहुंच गई है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम 78.84 फीसदी आबादी को सस्ता राशन दिया जा सकता है। खबर लिखे जाने के दिन यानी 26 अक्तूबर 2017 की शाम तीन बजे तक पूर्ति विभाग की वेबसाइट पर 218708 (कार्डधारक) परिवारों के 976497 लोग दर्ज हैं। इसमें 183510 राशनकार्ड पात्र गृहस्थी और 35198 राशनकार्ड अंत्योदय के हैं। यानी सस्ता राशन लेने वाले हर परिवार में औसतन करीब साढ़े चार सदस्य हैं।


कृषि और मजदूरी पर निर्भर ग्रामीण आबादी को खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लाभ देने में छल किया जा रहा है। बढ़ती आबादी के अनुपात में करीब 1324512 लोगों (294363 परिवार) को सस्ता राशन मिलना चाहिए। लेकिन पहले राशनकार्ड के फार्र्मों की फीडिंग और फिर दो माह पूर्व हुए सत्यापन में लगभग 75655 परिवारों को योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। गांव की पार्टी बंदी और अधिकारियों की अनदेखी के चलते ही योजना से वंचित लोग आए दिन कलक्ट्रेट और तहसीलों में प्रदर्शन करते हैं।
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तीनों तहसीलों और कलक्ट्रेट में राशनकार्ड बनाने और नाम काटने की औसतन रोज पांच-छह शिकायतें आती हैं। समीक्षा बैठकों में भी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन वास्तविक गरीबों को उनका हक नहीं दिलाया जा रहा है। इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी आमिर खान का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में योजना का संचालन एसडीएम के हाथ में है, फिर भी कहीं से शिकायत आती है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा।



दो नगर पालिका और चार नगर पंचायत हैं। फर्रुखाबाद को छोड़कर पांचों निकायों भी आबादी के अनुपात में खाद्य सुरक्षा लाभार्थियों की संख्या काफी कम है। 2011 में पांचों निकायों की आबादी करीब 384470 थी जो अब बढ़कर लगभग चार लाख तीस हजार से अधिक हो गई है। फिलहाल 62586 नागरिकों को सस्ता राशन दिया जा रहा है जबकि करीब 78250 लोगों को राशन मिलना चाहिए। कायमगंज को छोड़कर नगर पंचायतों का स्तर ग्राम पंचायतों जैसा ही है। नगर पंचायतों के भी ज्यादातर लोग खेती व छोटे मोटे कारोबार पर ही निर्भर हैं।



किस ब्लॉक में कितने लाभार्थी
ब्लॉक राशनकार्ड लाभार्थी
बढ़पुर 27694 125201
कायमगंज 30166 132906
कमालगंज 39547 197796
मोहम्मदाबाद 34090 156057
नवाबगंज 23842 99808
राजेपुर 31520 133002
शमशाबाद 31849 131724



जिले में ही नहीं पूरे प्रदेश में राशन वितरण प्रणाली में घालमेल है। हमारे पास भी आए दिन शिकायतें आती हैं। डीएम के साथ होने वाली बैठकों में हमेशा बात उठाता हूं। ज्यादातर कोटेदार सपा की मानसिकता के हैं, नीचे के अधिकारी भी वही हैं। निकाय चुनाव के बाद डीएम से टीम बनाकर घर घर सर्वे कराने को कहूंगा। जरूरत पड़ी तो सूबे के खाद्य और रसद मंत्री से भी बात की जाएगी। कुछ महीनों में सुधार करा लिया जाएगा। - मुकेश राजपूत भाजपा सांसद
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