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पहाड़ों के धमाकों में उड़ रहीं मानकों की धज्जियां

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अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। खनिज और प्रदूषण विभागों के तमाम मानकों और नियमों की खुली धज्जियां उड़ाकर पहाड़ तोड़ने का जानलेवा सिलसिला चित्रकूटधाम मंडल में जारी है। खासकर महोबा जनपद में पहाड़ों की चट्टानों को ध्वस्त करने के लिए जानलेवा विस्फोटों से मजदूरों और आसपास रहने वाले बाशिंदों पर मौत का साया मंडरा रहा है। ताजी घटना में शुक्रवार को कबरई में डायनामाइट से तोड़े जा रहे पहाड़ में एक मजदूर की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया।

मंडल मुख्यालय से नेशनल हाईवे (एनएच-76) पर महोबा की ओर बढ़ते ही मटौंध (बांदा) के आसपास से क्रेशरों की धुंध में सब कुछ ढका नजर आने लगता है। कबरई तक पहुंचते ही यह और गहरा जाता है। रात-दिन पहाड़ों में धमाके और क्रेशरों की धमक के बीच उड़ रही डस्ट आसपास के खेतों, गांवों के साथ नेशनल हाईवे को भी धुंध में ढांके रहती है। विस्फोट में चट्टानों के टुकड़े दूर-दूर तक गिरते हैं। इन टुकड़ों की चपेट में आकर खेतों और घरों में अब तक कई मौत हो चुकी हैं।
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महोबा के सामाजिक कार्यकर्ता पंकज परिहार ने बताया कि मजदूरों या बाशिंदों की मौत कोई नई बात नहीं है। ताजी घटना में शुक्रवार को डहर्रा पहाड़ में विस्फोट के दौरान राजू नामक मजदूर की मौत हो गई और दूसरा घायल है। उन्होंने बताया कि खदान के बगल में सार्वजनिक तालाब और मंदिर है। विस्फोट से उछलने वाले टुकड़े इनके लिए खतरे की घंटी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई पहाड़ों की खदानें ऐसी हैं जो अभिलेखों में बंद हैं, लेकिन मौके पर लगातार खनन चल रहा है। स्वयंसेवी आशीष सागर ने बताया कि किसी भी पहाड़ में नियम-कानूनों का पालन नहीं हो रहा। खदानों के पास सीमा चिन्ह या सूचना बोर्ड नहीं है।

-क्रेशरों की धुंध से ढका हाईवे और बस्तियां
-विस्फोट में एक और मजदूर की मौत, दूसरा घायल
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