चौडगरा। मलवां ब्लाक के मौहार गाव में सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को शिव पार्वती विवाह वृत्तांत सुनाया गया। कथावाचक राजकुमार वाजपेयी ने कहा कि शिव पार्वती विवाह श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने से मनुष्य के विचारों को समाजोपयोगी दिशा मिलती है। भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भाग लेने पहुंच गईं। यज्ञ कार्यक्रम में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया था। इससे दुखी हो सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया था। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। भगवान के मना करने के बाद भी सती नहीं मानी और पीहर चली गई थी। पीहर में सती का अपमान हुआ। इससे सीख मिलती है कि जो नारी अपने पति की आज्ञा की अवहेलना करती है। उसे संसार में अपमानित होना पड़ता है। जहां सम्मान न हो वहां नहीं जाना चाहिए। जाते ही जहां प्रसन्नता न हो वहां अपमानित होने से अच्छा है, वापस लौट आएं। कथा यही सिखाती है की जीवन जीना कैसे है। कथा समापन पर आरती और प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर पूर्व ब्लाक प्रमुख सुरेंद्र सिंह गौतम, अरुण शुक्ला, विवेक सिंह, मुनीम सिंह, रामसिंह कछवाह, डा. महेंद्र सिंह मौजूद थे।