फर्रुखाबाद। गरीबों को मुफ्त इलाज के दावे हवा-हवाई हैं। लोहिया अस्पताल में दो माह से ज्यादा समय से दवाइयों का संकट है। वायरल फीवर, खांसी, उल्टी-दस्त जैसी सामान्य बीमारियों में मुफ्त में दी जाने वाली दवाओं का अकाल है। एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध न होने के चलते आए दिन हंगामे की स्थिति बनी रहती है। तीमारदारों का कहना है कि सरकार मुफ्त इलाज का दावा कागजों में कर रही है।
मौसम के बदलते ही लोहिया अस्पताल में मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ने लगी है। मौजूदा समय में अस्पताल में प्रतिदिन 1200 से अधिक मरीज आकर अपना इलाज करवा रहे हैं। इनमें आसपास जिलों के भी मरीज शामिल हैं। अस्पताल में इस समय डायजीन सीरप, पैरासीटामॉल सीरप, एंटी रैबीज इंजेक्शन, टीटी इंजेक्शन, मलेरिया की
क्लोरोक्वीन गोली, टायबिटीज की गोली नहीं है। ऐसे में यहां पर आने वाले मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदना मजबूरी हो गया है। ऐसे में दूरदराज से आने वाले उन गरीब मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो पैसे के अभाव में किराया खर्च कर सस्ते इलाज की आस में आ रहे हैं लेकिन उन्हें बाहर से दवाइयां लिखी जा रही है।
इसके चलते इनके पास जितने पैसे बचते हैं। उतने की ही दवा लेकर मजबूरी में वापस लौट जाते हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिले का स्वास्थ्य विभाग भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसे में लोहिया अस्पताल में मिलने वाले सस्ते इलाज की बात बेमानी साबित हो रही है। हालांकि अस्पताल में एचआईबी, ईसीजी, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे के साथ ही खून की होने वाली जांचे जरूर फ्री हो रही हैं। सीएमएस डॉक्टर बीबी पुष्कर ने बताया कि जो दवाइयां नहीं हैं, उनकी डिमांड भेजी गई है। एंटी रैबीज इंजेक्शन जल्द ही आ जाएंगे।
मुफ्त इलाज के दावे हवा हवाई
लोहिया अस्पताल में दो माह से एंटी रैबीज इंजेक्शन समेत सामान्य रोगों में दी जाने वाली दवाओं का संकट
अमर उजाला ब्यूरो