बस स्टेशन को एक दशक पूर्व डिपो का दर्जा मिल गया था,
पर वर्कशाप के लिए जमीन की तलाश अभी भी जारी है। परिवहन निगम को अभी तक
जमीन नहीं मिल पाई है। लोगों का कहना है कि आखिर छिबरामऊ डिपो के दिन कब
बहुरेंगे। सीएम ने गुरसहायगंज में बस स्टेशन के लिए बजट स्वीकृत कर दिया
है, पर बस स्टेशन के सुंदरीकरण और डिपो के लिए जारी कवायद आखिर कब पूरी
होगी।
नगर में इटावा रीजन से जुड़े रोडवेज का बस स्टेशन पिछले काफी
वर्षों से है। करीब एक दशक पूर्व इस स्टेशन को छिबरामऊ डिपो का दर्जा
प्राप्त हो गया था। पहले यह बेवर डिपो से संबद्ध था। डिपो का दर्जा मिलने
के बाद बस स्टेशन पर ही वर्कशाप का काम शुरू हो गया।
हालांकि, विभागीय
अधिकारियों ने डिपो के निर्माण के लिए अलग से जमीन की तलाश शुरू कर दी।
इसके लिए विभागीय अफसरों ने नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर जमीनों की तलाश
की। कभी जमीन पसंद नहीं आई तो कभी पसंद की गई जमीन मुहैया नहीं हो पाई।
पिछले वर्ष विधायक अरविंद सिंह यादव ने अपने स्तर से वर्कशाप के लिए जमीन
की तलाश की पहल शुरू की। सौरिख रोड पर ग्राम लालकपुर के पास ग्राम समाज
की जमीन चिह्नित की गई। विभाग ने भूमि अधिग्रहण के लिए इसका प्रस्ताव बनाकर
भेज दिया। चिह्नित की गई जमीन को अधिग्रहण करने में तय की गई धनराशि भी
विभाग ने स्वीकृत कर दी।
इसके बाद भी वह जमीन विभाग को नहीं मिल पाई और एक
बार फिर वर्कशाप निर्माण का मामला अधर में लटक गया। पिछले दिनों
मुख्यमंत्री ने गुरसहायगंज में बस स्टेशन के निर्माण के लिए लगभग पौने दो
करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसकी जानकारी होते ही नगर के लोगों में भी एक
बार फिर से आशा की किरण जागी। लोगों ने मुख्यमंत्री से छिबरामऊ डिपो के
लिए जमीन उपलब्ध कराने और बस स्टेशन का सुंदरीकरण कराए जाने की मांग शुरू
कर दी है।