मांगों को लेकर लंबे समय से धरना-प्रदर्शन करती आ रही
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने बोर्डिंग मैदान पर बैठक की। इस
दौरान सांसद, विधायकों का घेराव करने की रणनीति बनाई। वहीं कार्यकारिणी का
गठन भी किया गया।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिका वेलफेयर एसोसिएशन
की प्रदेश उपाध्यक्ष सरिता शाक्य सहित अन्य पदाधिकारियों की मौजूदगी में
रविवार को आंगनबाड़ी व सहायिकाओं की बैठक बोर्डिंग मैदान पर आयोजित की गई।
इस मौके पर मांगों को लेकर चर्चा की गई।
पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल
जाता और 15 हजार रुपये मानदेय नहीं दिया जाता, तब तक सरकार से लड़ाई जारी
रहेगी। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी को जंतर-मंतर दिल्ली में धरना प्रदर्शन
किया जाएगा।
31 जनवरी को सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां व सहायिकाएं
अपने-अपने तहसील क्षेत्रों के विधायकों का घेराव करेंगी। यह कार्रवाई एक
बजे की जाएगी। प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार जनहित
की अति महत्वपूर्ण आईसीडीएस योजना के प्रति बेहद उपेक्षापूर्ण रवैया अपना
रही हैं।
आरोप लगाया कि अच्छे दिनों का सपना दिखाकर सत्ता में आई केंद्र
सरकार ने न सिर्फ बजट कटौती की, बल्कि योजना का निजीकरण का खाका तैयार करते
हुए इसे बंद करने की घोषणा कर दी थी। जिसके खिलाफ सांसदों का घेराव
एसोसिएशन द्वारा घेराव किया गया। सांसदों ने लोकसभा में मुद्दा उठाया।
इस
पर सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए। इसी तरह प्रदेश सरकार का रवैया भी
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के प्रति बेहद खराब है। इन पर सरकारी कार्यो का
भारी बोझ लाद दिया गया है। कार्यकत्रियों की कड़ी मेहनत के बल पर प्रदेश
पोलियो मुक्त हुआ।
कहा कि पूरे देश में सबसे कम मानदेय पर उत्तर प्रदेश
में कार्यकत्रियां बीते 14 वर्षों से काम कर रही हैं। उनके वेतन भत्ते में
बढ़ोतरी नहीं की गई है। बाद में वेलफेयर की जिला कमेटी का गठन किया गया,
जिसमें ममता मिश्रा को जिलाध्यक्ष व ममता पांडेय को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया
गया। नगर व ब्लाक कमेटियां भी गठित की गई।