कन्नौज। ग्रामीण अंचल की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने के लिए जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने एक नई पहल शुरू की है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अब सिर्फ सिलाई, कढ़ाई या पारंपरिक घरेलू कार्यों तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में इन महिलाओं को डेयरी व्यवसाय का आधुनिक प्रशिक्षण देकर दूध उत्पादन और विपणन के क्षेत्र में उतारा जाएगा, जिससे उनकी आय में भारी बढ़ोतरी हो सके।
योजना के तहत जिले के आठों ब्लॉकों में सक्रिय स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन किया जाएगा। इन्हें पशुपालन, दुग्ध संकलन, गुणवत्ता जांच और डेयरी प्रबंधन का विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, महिलाओं को उन्नत नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए आसान शर्तों पर ऋण और अनुदान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वह बिना किसी वित्तीय संकट के अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। इस पहल से जिले की सैकड़ों महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगी। पारंपरिक हस्तशिल्प और सिलाई-कढ़ाई के साथ-साथ डेयरी उद्योग से जुड़ने पर महिलाओं की मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
वर्जन
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को हासिल करना है। गांव स्तर पर दुग्ध उत्पादन केंद्र और चिलिंग प्लांट स्थापित करने की भी योजना है, जिससे महिलाओं द्वारा उत्पादित दूध का उचित मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच सके। इससे न केवल बिचौलियों का एकाधिकार खत्म होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और स्वच्छता के स्तर में भी सुधार होगा।
- राजकुमार लोधी, डीसी एनआरएलएम (उपायुक्त स्वतः रोजगार)