मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के
संसदीय क्षेत्र में एक बार फिर महिलाओं ने अपने दबदबे का अहसास कराया है।
शिल्पी कटियार ने जिला पंचायत अध्यक्ष बनकर लालबत्ती वाले इस पद पर महिलाओं
की बादशाहत कायम रखी। वहीं महिलाओं की रिकार्ड तोड़ जीत का सिलसिला लगातार
पांचवीं बार भी बरकरार रहा।
ज्ञात हो कि कन्नौज जनपद पहले फर्रुखाबाद
जिले की तहसील थी। नब्बे के दशक में छिबरामऊ के गांव निजामपुर निवासी
कप्तान सिंह यादव फर्रुखाबाद के जिला पंचायत अध्यक्ष थे। सितंबर 97 में
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कन्नौज को जिले का दर्जा दिया। इसके बाद
वर्ष 98 तक कप्तान सिंह ही जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर कायम रहे।
वर्ष 98
में सपा की ममता कनौजिया ने जिला पंचायत अध्यक्ष बनकर नवसृजित कन्नौज जिले
की पहली अध्यक्ष होने का गौरव हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2000 में हुए
चुनाव में फिर कांटे के मुकाबले में तत्कालीन भाजपा विधायक कैलाश राजपूत के
भाई की पत्नी पुष्पा राजपूत जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।
2005 में फिर हुए
चुनाव में ममता कनौजिया सपा पार्टी से ही जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं।
इसके बाद वर्ष 2010 में हुए चुनाव में बसपा प्रत्याशी मुन्नी अंबेडकर ने
अध्यक्ष पद की कुर्सी की जंग जीती। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने
के बाद वर्ष13 में हुए मतदान के दौरान सपा उम्मीदवार सदर विधायक अनिल दोहरे
की पत्नी सुनीता दोहरे जीतकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।
शिल्पी कटियार का
कोई खास राजनैतिक करियर नहीं है। पहली बार ही उन्होंने जिला पंचायत सदस्य
का चुनाव लड़ा और जीतीं। इसके बाद पहली बार में ही जीतकर अध्यक्ष बनीं।
उनका मायका ठठिया थाना क्षेत्र के गांव बेहटा में है। पिता रामऔतार कटियार
एक स्कूल में पढ़ाते हैं।
परिवार में उनकी दो बहनें व दो भाई गौरव कटियार व
रामू कटियार हैं। 29 वर्षीया शिल्पी कटियार परास्नातक पास हैं। वार्ड एक
से वह चुनाव लड़ीं, जहां 18 उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव में उन्हें कुल
8,941 वोट मिले थे। उन्होंने 2,817 मतों से जीत दर्ज की थी। तब शिल्पी के
अलावा अन्य सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। उनके प्राप्त मतों का
प्रतिशत वैध मतों के सापेक्ष 38.34 प्रतिशत रहा था।