बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि के चलते गेहूं, मक्का सहित दलहनी फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। वहीं कृषि विभाग का आंकलन है कि गेहूं के उत्पादन में तीस फीसदी तक की कमी आ सकती है। इसके चलते गेहूं के दाम काफी ऊंचे जा सकते हैं।
मौसम ने लगातार करवटें बदलकर किसानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया। आलू की कच्ची फसल की खुदाई के दौरान हुई बारिश से खुदाई बाधित हो गई। पक्की फसल में हुई बरसात से खुदाई बाधित हुई और आलू को खासा नुकसान पहुंचा है। गेहूं की फसल को पिछले दिनों कई बार हुई बारिश व तेज हवाओं से खेतों में पूरी तरह से पलट गई है।
कृषि विभाग की माने तो फसल के पलट जाने से गेहूं के उत्पादन में करीब तीस फीसदी की गिरावट आएगी। इसके अलावा चना सहित दलहनी फसलों को भी नुकसान हुआ है। जायद के मौसम में होने वाली हाईब्रिड मक्का का बाजार में अच्छा भाव मिलने से हर वर्ष जायद की मक्का के रकवे में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। हालांकि सूरजमुखी का क्षेत्रफल अन्य सालों से काफी घटा है।
इस बार शासन से जायद की मक्का के लिए 30 हजार 621 व सूरजमुखी के लिए 1531 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है। जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि अभी बुआई चल रही है। खराब मौसम से जिन किसानों की मक्का की बुआई करीब 25 दिन पहले हुई थी, उनको फायदा मिला है। हालांकि एक सप्ताह के अंदर बुआई करने वाले किसानों के खेतों में पानी भर जाने से मक्के का बीज अंकुरित नहीं हो सकेगा। इस कारण उन किसानों को करीब दस फीसदी का नुकसान पहुंचा है।
गेहूं में 30 से 32 फीसदी का नुकसान होने का अनुमान है। गेहूं के गिर जाने से दाना काफी पतला हो जाएगा। दलहनी फसलों में सबसे अधिक नुकसान सरसों व चना में हुआ है। इसमें 30 फीसदी के उत्पादन में गिरावट आएगी। जायद की कुछ दिनों में बोई गई मक्का में 5 से 10 प्रतिशत का नुकसान है। मक्का बीज के सड़ जाने पर दोबारा भी किसानों को फसल बोनी पड़ सकती है।
अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी
आपदा से बचाने को किया रुद्राभिषेक
किसानों पर आई आपदा से बचाने के लिए आर्शीवाद कोल्ड स्टोरेज स्थित आशुतोष मंदिर में आचार्य कात्यानी मिश्र ने रुद्राभिषेक का आयोजन किया। इस मौके पर शीतगृह स्वामी गोपाल कपूर शामिल हुए। उन्होंने किसानों को समृद्ध बनाए जाने की प्रार्थना की। इस मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान मौजूद रहे।
बारिश से सब्जियों के दाम में उछाल
बेमौसम बारिश ने सब्जियों के दामों में इजाफा कर दिया है। आलू जहां पांच रुपये किग्रा की दर से बिक रहा है, वहीं भिंडी के दाम 60 से 80 रुपये तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में मध्यम वर्ग की थाली से हरी सब्जियां गायब होने लगी हैं।
सब्जी मंडी में दुकान लगाए वसीम वारसी ने बताया कि सब्जियों के दामों में इजाफा हो रहा है।
बारिश ने इनके दामों को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। महंगाई के चलते बाजार में खरीद करने पहुंचने वाले लोगों की तादात में गिरावट आई है। इससे धंधा चौपट हो रहा है। बड़ी बाजार के दुकानदार इमरान रायनी ने बताया कि लौकी के दामों में भी इस बार बेतहाशा वृद्धि हुई है। यह 30 से 40 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच गई है। मध्यम वर्ग के लोग भी कटहल व आलू की खरीददारी कर रहे हैं।
सब्जी विक्रेता अख्तर ने बताया कि सलाद के लिए भी लोगों को खरीददारी करने में काफी सोच-विचार करना पड़ रहा है। टमाटर व प्याज के दाम भी 20 से 30 रुपये किग्रा पर पहुंच गए हैं। शनिवार व रविवार को हुई बारिश से मंडी में हरी सब्जी की आवक में कमी आई है।