lock on the wheat procurement center
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एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होनी थी। पहले ही दिन खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा मिला। कहीं पर भी बोहनी तक नहीं हुई। खरीद केंद्रों का भी हाल काफी खराब मिला। मंडी समिति स्थित खरीद केंद्र का ताला तक नहीं खुला। नगर की सहकारी समिति पर भी कोई भी खरीद की व्यवस्था नहीं दिखाई पड़ी। यहां तक की केंद्रों को खरीद का लक्ष्य तक नहीं पता है।
मौसम और दैवी आपदाओं की मार झेल रहे किसानों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से इस बार शासन ने गेहूं की सरकारी खरीद में बेशक काफी सहूलियत दी है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू होनी थी। नगर में खाद्य विभाग की ओर से मंडी समिति में और पीसीएफ की ओर से किसान सेवा सहकारी समिति छिबरामऊ पूर्वी में खरीद केंद्र स्थापित किया गया है। व्यवस्थाओं के नाम पर इन केंद्रों का हाल काफी खराब था।
अभी तक इन केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक कांटे तक नहीं पहुंचें है। सहकारी समिति के सचिव बृजेश सिंह यादव ने बताया कि कांटों में मुहर लगने के लिए मंडी समिति भेजे गए है। अभी तक न तो बारदाना उपलब्ध कराया गया है और न ही किसानों को गेहूं खरीद का भुगतान करने के लिए 1525 रुपये क्विंटल के हिसाब से धनराशि उपलब्ध कराई गई है। मंडी समिति स्थित विपणन विभाग के खरीद केंद्र का भी हाल इससे ज्यादा खराब था। वहां न तो बैनर लगाया गया था और न ही केंद्र के ताले खोले गए थे। सन्नाटा पसरा था।
केंद्रों पर कितना गेहूं खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है और खरीद के क्या मानक बनाए गए है, उनके निर्देश भी अभी तक केंद्र प्रभारियों को नहीं दिए गए है।