इस वर्ष कड़ाके की सर्दी और कोहरा कम पड़ने से गेहूं
उत्पादन करने वाले किसानों की नींद उड़ गई है। वहीं रबी सीजन की अन्य फसलें
भी प्रभावित हो रही हैं। आलू की फसल में झुलसा लोग लगातार बेलगाम होता जा
रहा है। इससे आलू उत्पादन भी घटने के आसार हैं।
कुल मिलाकर किसानों के
चेहरे की रंगत गायब हो गई है। कोई खेतों में ज्यादा पानी लगाकर तो कोई
दवाओं का छिड़काव करके फसलों की पैदावार बढ़ाने के उपाय करने में जुटा है,
पर कुदरत की मार के आगे कुछ कारगर होता नजर नहीं आ रहा है। इस बाबत किसानों
का कहना है कि एक दशक बाद ऐसा मौसम आया है कि सर्दी बेहद कम है।
कई-कई दिन
तक बादलों में सूर्य के छिपे रहने को लोग तरस गए। सुबह के वक्त समय से
सूरज निकलने के कारण कोहरा न के बराबर पड़ रहा है। नमी बढ़ाने के लिए
सिंचाई अधिक कर रहे हैं, पर इससे भी कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है। कुदरत
में आए इस परिवर्तन ने फसल चक्र को हिलाकर रख दिया है।