भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करके नेपाल से सकुशल नगर लौटे छह युवा दहशत में हैं। शनिवार को लौटे युवाओं ने जब भूकंप के तांडव की आंखो देखी कहानी परिजनों को कहानी बताई तो उसे सुनकर सभी के रोंगटे खड़े गए। युवकों का कहना है वह कई घंटे तक भूखे-प्यासे फंसे रहे। जब सेना ने पहाड़ का मलवा हटाकर रास्ता साफ किया। तब वह बाहर निकले। सनौली बार्डर पर पहुंचकर राहत की सांस ली।
नगर के मोहल्ला त्रिपाठीनगर निवासी अक्कू भदौरिया अपने पांच साथी विमलेश दुबे, मुकेश पांडेय, शांतनु दुबे, सिक्कू तिवारी, हनी गुप्ता के साथ निजी कार से नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर दर्शन करने गए थे। वह सभी रविवार को काठमांडू से वापस घर पहुंचे। उन्होंने बताया वह 22 अप्रैल की सुबह दस बजे नगर से यात्रा पर निकले थे।
रात दस बजे वह लोग काठमांडू पहुंच गए। रात्रि विश्राम के बाद 24 अप्रैल की शाम छह बजे पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। अगले दिन शनिवार सुबह नौ बजे वापस निकल पड़े। वह लोग काठमांडू से महज 15 किमी ही बाहर निकल पाए थे, तभी तेज आंधी आई। धूल के गुबार ने सब कुछ ढक दिया। इसके बाद तेज कंपन से धरती हिलने लगी। पहाड़ गिरने लगे, मकान धरासाई होने लगे।
यह देख वह अपने साथियों के साथ कार से निकलकर भागे और सुरक्षित खुले स्थान पर जाकर रुके। उन्हाेंने बताया पहला झटका आने के कुछ देर बाद दूसरा झटका उससे भी ज्यादा तेज था। इसके बाद तीसरा झटका सिर्फ महसूस हुआ। घबराहट के कारण सभी बदहवास थे। मौत का मंजर सामने देखकर वह सभी सुधबुध खो बैठे थे। उधर सड़क पर पहाड़ का मलवा आ जाने से आवागमन ठप हो गया था। करीब पांच घंटे तक वह रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे। सुरक्षा बल के जवानों ने जब जेसीबी मशीन से मलवा साफ किया तब वह लोग बाहर निकल सके। सुनौली बार्डर पहुंचने पर उन्होंने राहत की सांस ली।